Citizenship Rules 2026: अब जिलाधिकारी दे सकेंगे भारतीय नागरिकता! 8 राज्यों में बदले नियम, जानिए किसे मिलेगा फायदा

Citizenship Rules 2026: केंद्र सरकार ने नागरिकता से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जिलाधिकारी यानी District Magistrate को नागरिकता से जुड़े कुछ आवेदनों को स्वीकार करने, उनकी जांच करने और पात्र पाए जाने पर नागरिकता देने का अधिकार दिया गया है।
गृह मंत्रालय ने Citizenship (Third Amendment) Rules, 2026 को अधिसूचित किए जाने की जानकारी दी है। यह बदलाव खास तौर पर Citizenship Act की धारा 6B के तहत आने वाले आवेदनों की प्रक्रिया से जुड़ा है। धारा 6B नागरिकता संशोधन कानून के तहत पात्र लोगों के पंजीकरण या प्राकृतिकरण से संबंधित है।
आखिर किन 8 राज्यों में लागू होंगे नए नियम?
नए नियमों के तहत इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के संबंधित जिलाधिकारी नागरिकता आवेदन प्रक्रिया में सक्षम प्राधिकारी की भूमिका निभाएंगे:
- गुजरात
- राजस्थान
- पंजाब
- पश्चिम बंगाल
- असम
- त्रिपुरा
- जम्मू-कश्मीर
- लद्दाख
हालांकि, असम और त्रिपुरा के Sixth Schedule के तहत आने वाले जनजातीय क्षेत्रों पर धारा 6B का प्रावधान लागू नहीं होता। यह अपवाद नागरिकता संशोधन कानून में ही निर्धारित है।
जिलाधिकारी को क्या-क्या अधिकार मिले?
अधिसूचित व्यवस्था के तहत जिलाधिकारी नागरिकता के लिए आने वाले पात्र आवेदनों को स्वीकार करने, दस्तावेजों की जांच करने और आवश्यक पूछताछ के बाद उनका निपटारा करने की प्रक्रिया संभालेंगे।
यानी अब आवेदन की प्रक्रिया के लिए संबंधित जिलाधिकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि जांच के बाद अधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि आवेदक कानून के तहत योग्य और उपयुक्त है, तो निर्धारित प्रक्रिया पूरी करके नागरिकता प्रदान की जा सकती है।
आवेदन की जांच कैसे होगी?
नागरिकता के लिए आवेदन जमा होने के बाद सिस्टम की ओर से पावती जारी की जाएगी। इसके बाद जिलाधिकारी आवेदक द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की जांच करेंगे।
जरूरत पड़ने पर आवेदक की पात्रता और उपयुक्तता सुनिश्चित करने के लिए पूछताछ भी की जाएगी। साथ ही आवेदक को कानून में निर्धारित निष्ठा की शपथ दिलाई जाएगी।
इसके बाद धारा 6B के तहत नागरिकता देने की पात्रता को लेकर जिलाधिकारी संतुष्ट होने पर आगे की प्रक्रिया पूरी करेंगे।
क्या आवेदन खारिज भी किया जा सकता है?
हां। नए नियमों में जिलाधिकारी को आवेदन खारिज करने की शक्ति भी दी गई है।
अगर किसी आवेदक को उचित अवसर दिए जाने के बावजूद आवेदन पर हस्ताक्षर करने और निष्ठा की शपथ लेने के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होता है, तो नियमों के अनुसार उसका आवेदन खारिज किया जा सकता है।
यानी केवल आवेदन जमा कर देना पर्याप्त नहीं होगा। पात्रता, दस्तावेजों की जांच और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी रहेगा।
लंबित आवेदन भी जिलाधिकारियों को भेजे जाएंगे
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अधिसूचित क्षेत्रों में पहले से लंबित आवेदनों को संबंधित जिलाधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया गया है।
इससे नागरिकता से जुड़े मामलों की प्रक्रिया जिला स्तर पर अधिक सीधे तरीके से आगे बढ़ सकेगी।
धारा 6B आखिर किससे जुड़ी है?
Citizenship Act में जोड़ी गई धारा 6B नागरिकता संशोधन कानून के तहत पात्र व्यक्तियों को पंजीकरण या प्राकृतिकरण के जरिए भारतीय नागरिकता देने की व्यवस्था से संबंधित है। कानून में यह भी स्पष्ट किया गया है कि धारा 6B के प्रावधान असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा के Sixth Schedule वाले जनजातीय क्षेत्रों तथा बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 के तहत आने वाले Inner Line क्षेत्रों पर लागू नहीं होते।
क्या बदला है सबसे बड़ा?
सबसे अहम बदलाव यह है कि नागरिकता से जुड़े पात्र आवेदनों की प्रक्रिया में जिलाधिकारी की भूमिका अब और महत्वपूर्ण हो गई है। पहले जिन सक्षम समितियों और अधिकारियों के स्तर पर यह प्रक्रिया होती थी, उनकी जगह संबंधित जिलाधिकारी को अधिकार दिए जाने से आवेदन की जांच और निपटारे की प्रक्रिया जिला स्तर पर होगी।
हालांकि, नागरिकता स्वतः नहीं मिलेगी। आवेदक को संबंधित कानून और नियमों के तहत पात्रता पूरी करनी होगी तथा दस्तावेजों और अन्य आवश्यक जांच में योग्य पाए जाने के बाद ही नागरिकता देने की प्रक्रिया पूरी होगी।












