एसी वाली जिंदगी ने छीनी गर्मी सहने की ताकत! तापमान उतना ही, लेकिन बदल गई इंसानों की सहनशक्ति और लाइफस्टाइल

पहले भी पड़ती थी 48 डिग्री गर्मी… फिर अब क्यों लग रहा ‘आग बरस रहा आसमान’? जानिए शरीर और मौसम का खतरनाक कनेक्शन

नई दिल्ली। मई-जून की तपती दोपहर आते ही हर साल एक सवाल लोगों के दिमाग में घूमने लगता है — क्या सच में गर्मी पहले से ज्यादा खतरनाक हो गई है, या फिर अब हमारा शरीर उसे झेलने लायक नहीं बचा? राजधानी दिल्ली समेत देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच यह बहस फिर तेज हो गई है।

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक हाल ही में दिल्ली में अधिकतम तापमान 43.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि ऐसा तापमान कोई पहली बार नहीं पहुंचा। साल 2012 में भी दिल्ली का तापमान इसी स्तर तक गया था। इतना ही नहीं, 4 जून 1989 को राजधानी में 48 डिग्री सेल्सियस तक तापमान दर्ज किया जा चुका है। इसके बावजूद आज लोगों में गर्मी को लेकर बेचैनी और घबराहट पहले से कहीं ज्यादा दिखाई दे रही है।

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विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ तापमान ही नहीं, बल्कि हमारी बदलती जीवनशैली भी इसके पीछे बड़ी वजह है। पहले लोग प्राकृतिक माहौल में ज्यादा रहते थे। घरों में कूलर चलते थे, लोग बसों में सफर करते थे और शरीर धीरे-धीरे गर्मी सहने के लिए खुद को ढाल लेता था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।

आज घर से निकलते ही एसी कार, दफ्तर में एसी, मेट्रो में एसी और फिर घर लौटकर घंटों एयर कंडीशनर में रहना आम बात हो गई है। शरीर लगातार कृत्रिम ठंडे वातावरण का आदी होता जा रहा है। यही कारण है कि जैसे ही तेज धूप या गर्म हवा लगती है, शरीर तुरंत प्रतिक्रिया देने लगता है। लोगों को चिड़चिड़ापन, थकान और बेचैनी ज्यादा महसूस होने लगी है।

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विशेषज्ञों के अनुसार एयर कंडीशनर आधुनिक जीवन की जरूरत जरूर बन चुका है, लेकिन इसके लगातार इस्तेमाल से शरीर की प्राकृतिक सहनशक्ति और इम्युनिटी प्रभावित हो रही है। प्राकृतिक धूप और हवा से दूरी बढ़ने का असर त्वचा, मांसपेशियों, हड्डियों और स्वास्थ्य के कई हिस्सों पर पड़ता है।

एक बड़ा सच यह भी है कि शहरों का तेजी से कंक्रीट में बदलना, पेड़ों की कमी और लगातार बढ़ती आबादी ने गर्मी को और ज्यादा महसूस होने वाला बना दिया है। बिजली कटते ही लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है, क्योंकि शरीर अब प्राकृतिक गर्म माहौल का अभ्यस्त नहीं रह गया।

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मौसम विभाग का अनुमान है कि नौतपा के दौरान दिल्ली और आसपास के इलाकों में तापमान अगले कुछ दिनों तक 43 से 44 डिग्री के बीच बना रह सकता है। यानी आने वाले दिन और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

ऐसे में सवाल सिर्फ मौसम का नहीं, बल्कि हमारी बदलती जीवनशैली का भी है। तापमान भले ही पहले जैसा हो, लेकिन अब उसे सहने की ताकत धीरे-धीरे कम होती जा रही है।

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