न नदी की क्लास, न फीस और न कोई स्कूल बिल्डिंग! PM मोदी ने सुनाई ऐसी कहानी, जिसने लाखों लोगों का दिल जीत लिया
एक दर्दनाक हादसे से शुरू हुआ मिशन, अब 15 हजार से ज्यादा लोगों को तैराकी सिखा चुका है यह अनोखा स्विमिंग क्लब

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 134वें एपिसोड में एक ऐसी प्रेरणादायक पहल का जिक्र किया, जिसने हजारों लोगों की जिंदगी बदल दी है। केरल के आलुवा में चल रहे एक अनोखे स्विमिंग क्लब की कहानी सुनाते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि यहां न कोई बड़ी इमारत है, न क्लासरूम और न ही कोई फीस ली जाती है, फिर भी यह जगह लोगों के लिए जीवन बचाने वाली पाठशाला बन चुकी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गर्मी की छुट्टियों के दौरान जहां स्कूल बंद रहते हैं, वहीं देश में कुछ ऐसे प्रयास भी हो रहे हैं, जिनसे हर किसी का जुड़ने का मन कर सकता है। उन्होंने लोगों से कल्पना करने को कहा कि एक ऐसा स्कूल जहां बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी आते हों, लेकिन उसकी क्लास किसी कमरे में नहीं बल्कि नदी के बीच लगती हो।
प्रधानमंत्री ने बताया कि केरल के आलुवा में साजी वलाशेरिल नामक व्यक्ति वर्षों से एक स्विमिंग क्लब चला रहे हैं। इस अनोखी पहल के जरिए अब तक 15 हजार से अधिक लोगों को तैराकी सिखाई जा चुकी है। खास बात यह है कि इस अभियान के तहत दिव्यांग बच्चों को भी तैरना सिखाया गया है, जिससे वे आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बन सके हैं।
हालांकि इस मिशन के पीछे एक बेहद भावुक और दर्दनाक कहानी भी छिपी है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि कुछ वर्ष पहले हुए एक नौका हादसे में कई छात्रों की जान चली गई थी। इस घटना ने साजी वलाशेरिल को भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने महसूस किया कि यदि बच्चों को तैरना आता होता तो शायद कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।
यही विचार आगे चलकर एक सामाजिक अभियान में बदल गया। साजी ने लोगों को मुफ्त में तैराकी सिखाने का संकल्प लिया और धीरे-धीरे यह पहल हजारों लोगों तक पहुंच गई। आज यह स्विमिंग क्लब न सिर्फ तैराकी सिखा रहा है, बल्कि लोगों को जल सुरक्षा और जीवन रक्षा का भी संदेश दे रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस उदाहरण को देश की सामूहिक शक्ति का प्रतीक बताते हुए कहा कि भारत के हर गांव और शहर में ऐसे कई प्रेरणादायक प्रयास हो रहे हैं, जिनकी चर्चा भले ही कम होती हो, लेकिन उनका प्रभाव समाज पर गहरा पड़ता है।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की कि वे अपने आसपास समाज के लिए अच्छा काम करने वाले लोगों को पहचानें, उनकी सराहना करें और उनसे प्रेरणा लें। उन्होंने कहा कि यदि संभव हो तो हर व्यक्ति को किसी न किसी सामाजिक पहल से जुड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए।
केरल के इस स्विमिंग क्लब की कहानी आज यह साबित करती है कि एक व्यक्ति का संकल्प हजारों लोगों की जिंदगी में बदलाव ला सकता है और समाज को एक नई दिशा दे सकता है।












