इस दिन झारखंड में दवा दुकानों पर ताला…ऑनलाइन बिक्री के खिलाफ बड़ा ऐलान…घर में पहले ही जमा कर लें जरूरी दवाएं
Drugstores in Jharkhand to remain shut on this day... Major announcement against online sales... Stock up on essential medicines at home in advance.

रांची से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां ऑनलाइन दवाओं की बढ़ती बिक्री के खिलाफ झारखंड के दवा व्यवसायियों ने निर्णायक कदम उठाया है। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के आह्वान पर 20 मई को पूरे राज्य में दवा दुकानों का व्यापक बंद रहेगा।
इस दौरान करीब 18 हजार से अधिक दवा दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी, जिनमें लगभग आठ हजार थोक और करीब 12 हजार खुदरा दुकानें शामिल हैं। हालांकि मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अस्पताल और क्लीनिक से जुड़ी फार्मेसी सेवाओं को इस बंद से अलग रखा गया है।
रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस, एसोसिएशन ने जताई कड़ी नाराजगी
इस आंदोलन की जानकारी रांची स्थित होटल कैपिटोल हिल में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दी गई। झारखंड केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष उमेश कुमार श्रीवास्तव और महासचिव सुभाषचंद्र मंडल ने साफ कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर लंबे समय से उठ रही मांगों पर सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
उन्होंने बताया कि इस स्थिति का असर सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि देशभर के लाखों दवा व्यवसायियों पर पड़ रहा है।
ई-फार्मेसी पर गंभीर आरोप, फर्जी पर्चियों से दवा बिक्री का दावा
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि एआई तकनीक का दुरुपयोग कर फर्जी प्रिस्क्रिप्शन तैयार किए जा रहे हैं, जिनके आधार पर एंटीबायोटिक और नशीली दवाओं की बिक्री हो रही है।
यह स्थिति न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एनपीपीए और डीपीसीओ के तहत तय कीमतों के बावजूद ऑनलाइन कंपनियां भारी छूट देकर बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा पैदा कर रही हैं, जिससे छोटे दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो रहा है।
मुख्य मांगें क्या हैं, जानिए व्यापारियों की बड़ी बातें
दवा व्यवसायियों ने केंद्र सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं। उन्होंने कोविड काल के दौरान जारी अस्थायी अधिसूचनाओं को खत्म करने और ई-फार्मेसी से जुड़ी व्यवस्था को स्पष्ट रूप से नियंत्रित करने की मांग की है।
इसके अलावा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर दी जा रही भारी छूट पर रोक लगाने के लिए एक समान और सख्त कानून बनाने की भी मांग उठाई गई है। उनका कहना है कि अनियंत्रित डिस्काउंट से पारंपरिक दवा दुकानों का अस्तित्व खतरे में है।
बंद के दौरान मरीजों को राहत, अस्पतालों में दवाएं मिलती रहेंगी
हालांकि इस बंद के बीच मरीजों की सुविधा को प्राथमिकता दी गई है। एसोसिएशन ने साफ किया है कि अस्पतालों और क्लीनिकों में संचालित फार्मेसी सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी, ताकि इलाज में कोई बाधा न आए।












