दो वरिष्ठ IAS की प्रतिद्वंदिता में पीस रहे हैं जनसेवक और करा रहे हैं सरकार की किरकिरी…. पढ़िए आखिर क्यों कहना पड़ा संघ के राष्ट्रीय सचिव को…

रांची । झारखंड राज्य जनसेवक संघ की बैठक को संबोधित करते हुए सेवानिवृत्त जनसेवक एवं अखिल भारतीय पेंशनर समाज के राष्ट्रीय सचिव महेश कुमार सिंह ने कहा की राज्य के दो वरिष्ठ आईएएस की प्रतिद्वंदिता की लड़ाई में राज्य भर के VLW पीस रहे हैं।
श्री सिंह ने कहा कि कृषि एक विज्ञान है । प्रति दिन कृषि संबंधी नये-नये अनुसंधान एवं आविष्कार हो रहे हैं,जिसे जमीन पर उतारने का काम जनसेवक ही करते हैं, जिस तरह हृदय से निकला हुआ रक्त को समूचे शरीर में धमनी और शिरायें ही पहूँचाती हैं। किसी एक पदाधिकारी के द्वारा कृषि का विकास संभव नहीं है। आज राज्य भर के जनसेवक 10 वर्षों के सेवा के बाद वेतन घटाने से नाराज होकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं जिससे प्रखंड एवं अंचल कार्यालय से लेकर पंचायतों एवं गांव के किसानों को भी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
एक तरफ हेमंत सोरेन पुरानी पेंशन बहाल कर राज्य कर्मियों के बीच एक संवेदनशील सरकार के रूप में अपने छवि मजबूत करने में लगे हुए हैं वहीं दूसरी ओर ऐसे अधिकारी अपने व्यक्तिगत द्वेष में सरकार की किरकिरी करा रहे हैं।
वेतन घटाने की फाइल को देखने से एक आम व्यक्ति भी समझ सकता है कि इतने वरिष्ठ अधिकारी के द्वारा किए गए टिप्पणी किसी भी नजरिए से पेशेवर ना होकर अपने समकक्षीय अधिकारी को नीचा दिखाने के लिए किया गया है।
कैबिनेट द्वारा पारित 2012 के सेवा नियमावली कि गलत तरीके से व्याख्या ही उनकी मंशा स्पष्ट करती है।
मुख्यमंत्री जी को ऐसे अधिकारियों से सावधान रहना चाहिए अन्यथा वे जनता के बीच उनकी छवि को कमजोर कर देंगे।
कृषि विभाग को कई दशक पहले 1978 में ही तकनीकि घोषित किया गया है। मैट्रिक साइन्स या मैथ के साथ दो वर्ष का कृषि डिप्लोमा तथा छः माह का ई 0 टी0 सी0 प्रशिक्षण करने के पश्चात ही जनसेवकों की बहाली होती थी। जनसेवकों का वेतनमान अन्य तृतीय वर्ग से सबसे अधिक वेतनमान जनसेवकों का होता था। उसी आधार पर बाद में आई0 एस0 सी0 की योग्यता एवं छः माह का प्रशिक्षण के नाते भी जनसेवकों का ग्रेड पे 2400/= वाजिब एवं न्यायोचित है।
उन न्यायोचित मांगों को झारखण्ड सरकार के द्वारा तमाम समस्याओं को मान कर जनसेवकों का ग्रेड पे 2400/=रू0 बरकरार रखा जाय।









