11 साल पहले शिक्षक की हुई थी मौत, रोजगार मांगने पत्नी पहुंची महिला आयोग

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने बेमेतरा में जनसुनवाई कर 19 मामलों की सुनवाई की। अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने मृत शिक्षाकर्मी की पत्नी को रोजगार दिलाने की अनुशंसा की, साथ ही स्व-सहायता समूह लोन और प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े मामलों में भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

बेमेतरा(छत्तीसगढ़)।छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक एवं प्रभारी सदस्य श्रीमती सरला कोसरिया ने आज जिला पंचायत सभा कक्ष, बेमेतरा में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों की जनसुनवाई की। डॉ. नायक की अध्यक्षता में आयोजित यह प्रदेश स्तर की 400वीं तथा बेमेतरा जिले की 5वीं सुनवाई थी, जिसमें बेमेतरा एवं कबीरधाम (कवर्धा) जिले के कुल 19 प्रकरणों पर एक साथ विचार किया गया।

सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण प्रकरण में मृत शिक्षाकर्मी की पत्नी द्वारा रोजगार सहायता की मांग की गई। आवेदिका ने बताया कि उनके पति का निधन वर्ष 2015 में हो गया था तथा वर्तमान में वह दो बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं। आयोग ने मामले को मानवीय दृष्टिकोण से गंभीरता से लेते हुए आवेदिका को किसी उपयुक्त विभाग में रोजगार उपलब्ध कराने की अनुशंसा की। जिला पंचायत की उप संचालक भूमिका देशाई ने कलेक्टर से चर्चा कर रोजगार उपलब्ध कराने में सहयोग का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रकरण का निराकरण कर नस्तीबद्ध किया गया।

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एक अन्य मामले में महिला स्व-सहायता समूह के नाम पर लिए गए 12 लाख रुपये के बैंक ऋण की अदायगी नहीं होने का मामला सामने आया। सुनवाई में अनावेदक ने ऋण चुकाने की बात स्वीकार की, किंतु अब तक राशि जमा नहीं की गई है। आयोग को बताया गया कि मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है तथा अनावेदक अग्रिम जमानत पर है। आयोग ने आवेदिका को विधिक सहायता प्राप्त कर न्यायालय में प्रभावी पैरवी करने की सलाह दी।

इसी प्रकार प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े एक प्रकरण में आवेदिका ने आरोप लगाया कि मकान निर्माण के लिए प्राप्त राशि का दुरुपयोग किया गया है। आयोग ने आवेदिका को कलेक्टर कबीरधाम को लिखित शिकायत प्रस्तुत करने तथा संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की सलाह दी। आयोग ने स्पष्ट किया कि योजना की राशि के दुरुपयोग के लिए जिम्मेदार लोगों से राशि की वसूली कराई जा सकती है। साथ ही आवेदिका को थाना लोहारा में शिकायत दर्ज कराने एवं आवश्यकतानुसार दीवानी न्यायालय की शरण लेने का अधिकार बताया गया।

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सुनवाई के दौरान आयोग ने सभी पक्षों को सुनते हुए महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें न्याय दिलाने के उद्देश्य से आवश्यक निर्देश जारी किए। राज्य महिला आयोग की इस पहल से पीड़ित महिलाओं को राहत मिलने के साथ ही उनके मामलों के त्वरित निराकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।

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