झारखंड- आचार संहिता में क्या-क्या हुआ बैन: छुट्टी पर बैन, प्रमोशन, ट्रांसफ़र पर भी प्रतिबंध, मंत्रियों, विधायकों, सरकारी कर्मचारियों व अफसरों पर रहेगा ये प्रतिबंध, जानिये डिटेल

Jharkhand – What are the restrictions imposed under the code of conduct: Ban on leave, promotions, and transfers. These restrictions will apply to ministers, MLAs, government employees, and officers. Learn the details.

रांची। झारखंड में निकाय चुनाव का ऐलान हो गया है। चुनाव की तारीख के ऐलान के साथ ही प्रदेश में आचार संहिता प्रभावी हो गईं है। आचार संहिता लागू होते ही कई तरह के प्रतिबंध शासकीय कर्मचारियों पर लग गए है।वहीं मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों पर भी आचार संहिता का निर्देश लागू हो गया है।

 

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आचार संहिता में क्या कुछ प्रतिबंध शासकीय कर्मचारियों के लिए होगा, किन नियमों का पालन मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को करना होगा ? अलग-अलग बिंदुओं पर आचार संहिता को लेकर दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। आचार संहिता लागू होते ही कर्मचारी और अधिकारियों की छुट्टी पर प्रतिबंध लग जाएगा, विशेष परिस्थिति में कर्मचारियों अधिकारियों को छुट्टी तो मिलेगी, लेकिन इसके लिए उन्हें जरूरी प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।

 

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उपायुक्त की तरफ से अधिकृत अधिकारी की मंजूरी के बिना शासकीय अधिकारी और कर्मचारी छुट्टी पर नहीं जा सकेंगे वहीं प्रमोशन, पोस्टिंग और ट्रांसफ़र पर भी बैन लगेगा। जब तक चुनाव की प्रक्रिया पूरी नहीं होगी, तब तक कैबिनेट में भी संदर्भित क्षेत्रों के लिए कोई निर्णय नहीं लिये जायेंगे। हालांकि सदन की कार्यवाही या बजट में चुनावी आचार संहिता का असर नहीं होगा।

 

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शासकीय विभागों एवं कर्मियों के लिए-

 

(1) निर्वाचन कार्य में लगे या निर्वाचन कार्य से सम्बद्ध अधिकारी/कर्मचारी चुनाव में बिल्कुल निष्पक्ष रहेंगे। यह आवश्यक है कि वे किसी को यह महसूस न होने दें कि वे निष्पक्ष नहीं है। जनता को उनकी निष्पक्षता पर विश्वास होना चाहिए तथा उनके द्वारा ऐसे कोई कार्य नहीं किए जाएगे जिससे ऐसी आशका हो कि वे किसी उम्मीदवार की मदद / विरोध कर रहे है।

 

(2) चुनाव के दौरे के समय यदि कोई भी मत्री निजी मकान पर आयोजित किसी कार्यक्रम का आमत्रण स्वीकार कर लें तो कोई अधिकारी या कर्मचारी इसमें शामिल नहीं होगा। यदि कोई निमत्रण पत्र प्राप्त हो तो उसे नम्रतापूर्वक अस्वीकार कर दें।

 

(3) साधारणतया चुनाव के समय जो आम सभा आयोजित की जाती है उसे चुनाव सम्बन्धी सभा माना जाएगा और उस पर कोई शासकीय व्यय नहीं किया जाएगा। अतः चुनाव के दौरान चुनाव क्षेत्र में नवीन निर्माण कार्य या किसी परियोजना के शिलान्यास या उद्घााटन कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जाएगा।

 

(4) उन अधिकारियो को छोडकर जिन्हें ऐसी सभा या आयोजन में कानून एवं व्यवस्था के लिए या सुरक्षा के लिए तैनात किया गया हो, दूसरे अधिकारी ऐसी सभा या आयोजन में शामिल नहीं होगे।

 

(5) यदि कोई मंत्री चुनाव को कार्य के लिए चुनाव क्षेत्र में जाए तो सुरक्षा में लगे अधिकारी एवं कर्मचारी के सिवाय अन्य शासकीय अधिकारी व कर्मचारी उनके साथ नहीं जाएगे।

 

(6) किसी सार्वजनिक स्थान पर चुनाव समा के आयोजन हेतु अनुमति देते समय विभिन्न उम्मीदवारों के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। यदि एक ही दिन में कई उम्मीदवार एक्क ही जगह पर सभा करना चाहते हों तो उस उम्मीदवार को अनुमति दी जाएगी जिसने सबसे पहले आवेदन पत्र दिया हो।

 

(7) नगरपालिकाओं/नगर निगमों, सहकारी संस्थाओं एवं सार्वजनिक उपक्रमों, प्राधिकरणों, निकायों, जिला पंचायतों के वाहनों का उपयोग मंत्रीगण, सासद एवं विधानमण्डल सदस्यों, पंचायतों एवं नगर निकायों के निर्वाचित पदाधिकारियों अपना उम्मीदवारों द्वारा नहीं किया जाएगा।

 

(8) मंत्रीगण, पचायतों एवं नगर निकायों के निर्वाचित पदाधिकारियों द्वारा विवेकाधीन कोष से कोई सहायता या कोई अनुदान स्वीकृत नहीं किया जाएगा और न ही किसी सहायता या अनुदान का आश्वासन दिया जाएगा।

 

(8) शासकीय अथवा अर्द्धशासकीय विभागों या सस्थानों द्वारा ऐसे विज्ञापन समाचार पत्रो अथवा अन्य प्रचार माध्यमों से नहीं दिये जाएगे जो सत्तारूढ़ दल के शासन अथवा विभाग या सस्थाओं के उल्लेखनीय प्रगति, भावी योजना या आश्वासनो को रेखांकित करते हो।

 

(10) पंचायत्तो/नगरीय निकायों के निर्वाचन में उनके कोष से कोई धनराशि नहीं निकाली जायगी परन्तु विद्यालयों में छात्रों को दी जाने वाली मिड डे मील योजना प्रभावित नहीं होगी।

 

(11) निर्वाचन की अधिसूचना निर्गत होने के बाद राजस्व, पुलिस, विकास विभाग तथा निर्वाचन से सम्बन्धित अधिकारियो/कर्मचारियों का स्थानान्तरण नहीं किया जायगा। विशेष परिस्थितियों में राज्य निर्वाचन आयोग की पूर्वानुमति के बाद ही स्थानान्तरण आदेश’ निर्गत किया जायगा।

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