कलावे बांधते वक्त क्यों लगायी जाती है 3,5 और 7 गांठें, हर गांठ का अलग है महत्व, जानिये लाल, काला व पीला कलावे का रहस्य और नियम…

Why are 3, 5, and 7 knots tied when fastening the sacred thread (*kalava*)? Each knot holds a unique significance; discover the secrets and rules associated with red, black, and yellow *kalavas*...

Kalawa Significance in Hinduism: हिंदू धर्म में कलावा या मौली केवल एक धागा नहीं, बल्कि आस्था, सुरक्षा और शुभता का प्रतीक माना जाता है। हर पूजा-पाठ, यज्ञ, व्रत, गृह प्रवेश, विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के दौरान कलाई पर कलावा बांधने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। सनातन धर्म में मान्यता है कि कलावा नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है और जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आता है।लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कलावे में अक्सर 3, 5 या 7 गांठें ही क्यों लगाई जाती हैं? इसके पीछे भी धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।

3 गांठों का क्या है महत्व?

दरअसल कलावे में तीन गांठ लगाने की परंपरा सबसे अधिक प्रचलित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ये तीन गांठें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक मानी जाती हैं। माना जाता है कि त्रिदेव का आशीर्वाद जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखता है।कुछ परंपराओं में इन तीन गांठों को मन, वचन और कर्म की पवित्रता से भी जोड़ा जाता है। यह व्यक्ति को अच्छे विचार, अच्छे शब्द और अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देती हैं।

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5 गांठें क्यों लगाई जाती हैं?

वहीं ज्योतिष और धर्मशास्त्रों के अनुसार पांच गांठें पंचतत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं। इनमें पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश शामिल हैं।मान्यता है कि मानव शरीर भी इन्हीं पांच तत्वों से बना है। इसलिए 5 गांठों वाला कलावा व्यक्ति के जीवन में संतुलन, सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति बनाए रखने में सहायक माना जाता है। कई लोग ग्रह दोष शांति के लिए भी इसे धारण करते हैं।

7 गांठों वाला कलावा क्यों माना जाता है शुभ?

सनातन धर्म में अंक 7 का विशेष महत्व है। सप्तऋषि, सात लोक, सात समुद्र, सात चक्र और विवाह के सात फेरे जैसी परंपराएं इसकी महत्ता को दर्शाती हैं।धार्मिक मान्यता के अनुसार 7 गांठों वाला कलावा विशेष सुरक्षा, शुभता और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक होता है। इसे सात ग्रहों की सकारात्मक ऊर्जा से भी जोड़ा जाता है। इसलिए कई विशेष अनुष्ठानों में सात गांठों वाला कलावा बांधा जाता है।

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जानिये लाल और पीले कलावे का धार्मिक रहस्य

कलावा सामान्यतः लाल या लाल-पीले रंग का होता है।

  • लाल रंग शक्ति, साहस, प्रेम, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
  • पीला रंग ज्ञान, सूर्य, समृद्धि और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना जाता है।

इसी कारण नवरात्रि, दीपावली, विवाह, गृह प्रवेश और अन्य धार्मिक आयोजनों में लाल या लाल-पीले कलावे का उपयोग किया जाता है।

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कलावा कब उतारना चाहिए?

धार्मिक मान्यता के अनुसार जब कलावे का रंग फीका पड़ जाए या उसके धागे टूटने लगें, तब उसे उतार देना चाहिए। पुराने और क्षतिग्रस्त कलावे को लंबे समय तक नहीं पहनना चाहिए।

उतारे गए कलावे का क्या करें?

शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार कलावा उतारने के बाद उसे सम्मानपूर्वक विसर्जित करना चाहिए।

  • किसी पवित्र वृक्ष पर बांध सकते हैं।
  • नदी या बहते जल में प्रवाहित कर सकते हैं।
  • अग्नि में समर्पित कर सकते हैं।
  • उतारने के बाद दान-पुण्य करना भी शुभ माना जाता है।

किन राशियों के लिए शुभ माना जाता है कलावा?

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मेष, वृष, सिंह और मकर राशि के जातकों के लिए कलावा धारण करना विशेष रूप से शुभ माना गया है। हालांकि धार्मिक अनुष्ठानों में किसी भी राशि के लोग कलावा धारण कर सकते हैं।

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