झारखंड में टेक्सटाइल सेक्टर में 75 प्रतिशत लोकल लोगों को मिलेगी नौकरी, 6000 रुपये भी देगी सरकार, 1000 करोड़ निवेश और 20 हजार रोजगार का लक्ष्य, नई नीति तैयार
झारखंड सरकार ने टेक्सटाइल, अपैरल और फुटवियर पॉलिसी-2026 का ड्राफ्ट तैयार किया है। नई नीति के तहत 1000 करोड़ रुपये निवेश और 20 हजार रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।

रांची। झारखंड में जल्द ही टेक्सटाइल इंडस्ट्री का बूम दिखेगा। हेमंत सरकार ने राज्य को पूर्वी भारत का प्रमुख टेक्सटाइल, अपैरल और फुटवियर हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ‘झारखंड टेक्सटाइल, अपैरल एंड फुटवियर पॉलिसी-2026’ का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इस नीति का उद्देश्य राज्य में 1000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करना और 20 हजार से अधिक नए रोजगार सृजित करना है। इस नई नीति को 8 और 9 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित इनवेस्टर समिट के दौरान जारी किया जाएगा।
नॉन-वोवन और मेडिकल टेक्सटाइल पर रहेगा खास फोकस
नई नीति के तहत सरकार का विशेष ध्यान नॉन-वोवन टेक्सटाइल, मेडिकल टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट, इको-फ्रेंडली टेक्सटाइल और नॉन-लेदर फुटवियर उद्योगों को बढ़ावा देने पर रहेगा। नॉन-वोवन टेक्सटाइल का उपयोग हेल्थकेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए सरकार इस सेक्टर में बड़े निवेश को आकर्षित करने की तैयारी में है।
निवेशकों को मिलेंगी कई तरह की सब्सिडी और प्रोत्साहन
राज्य सरकार ने उद्योगों को आकर्षित करने के लिए कई आकर्षक प्रोत्साहन प्रस्तावित किए हैं। इनमें शामिल हैं—
- स्थायी पूंजी निवेश पर 20 प्रतिशत तक की प्रोजेक्ट निवेश सब्सिडी, अधिकतम 50 करोड़ रुपये तक।
- ब्याज अनुदान।
- स्टांप शुल्क में छूट।
- एसजीएसटी (SGST) प्रोत्साहन।
- बिजली शुल्क में राहत।
- निर्यात प्रोत्साहन।
- कौशल विकास सहायता।
- रोजगार आधारित वेतन सब्सिडी।
हर जिले में बनेगा टेक्सटाइल क्लस्टर या प्रशिक्षण केंद्र
ड्राफ्ट नीति के अनुसार राज्य के हर जिले में कम से कम एक क्लस्टर आधारित उत्पादन या प्रशिक्षण केंद्र विकसित किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
तसर रेशम उत्पादन में देश में नंबर-1 है झारखंड
झारखंड देश का सबसे बड़ा तसर रेशम उत्पादक राज्य है। राज्य में झारक्राफ्ट के माध्यम से 2.5 लाख से अधिक कारीगर, बुनकर, कताई कर्मी और अन्य श्रमिक जुड़े हुए हैं। इसके अलावा राज्य में 120 से अधिक प्राथमिक बुनकर सहकारी समितियां और 30 हजार से अधिक बुनकर सक्रिय हैं। सरकार का मानना है कि नई नीति इन पारंपरिक उद्योगों को भी नई मजबूती देगी।
स्थानीय युवाओं को रोजगार देना होगा अनिवार्य
नई नीति के तहत टेक्सटाइल कंपनियों को 75 प्रतिशत स्थानीय निवासियों को रोजगार देना अनिवार्य होगा। रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार कंपनियों को वेतन सब्सिडी भी देगी।
- पुरुष कर्मचारी पर 5,000 रुपये प्रति माह।
- महिला कर्मचारी पर 6,000 रुपये प्रति माह।
- एससी, एसटी और दिव्यांग कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त 1,000 रुपये प्रति माह।
तीन जोन में बांटा गया राज्य, अलग-अलग मिलेगा लाभ
सरकार ने निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य को तीन जोन में विभाजित किया है।
जोन-1: रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो और रामगढ़। यहां अतिरिक्त सब्सिडी नहीं मिलेगी।
जोन-2: हजारीबाग, गिरिडीह, कोडरमा, खूंटी, सरायकेला-खरसावां और देवघर। यहां 3 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी दी जाएगी।
जोन-3: शेष सभी जिलों को शामिल किया गया है, जहां उद्योग लगाने पर 5 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी।
पुरानी नीति से मिला था 1000 करोड़ तक निवेश
ड्राफ्ट नीति के अनुसार वर्ष 2016-21 की टेक्सटाइल नीति के दौरान राज्य में 500 से 1000 करोड़ रुपये तक का निवेश हुआ था, जिससे 10 से 15 हजार प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए। नई नीति में इससे भी अधिक निवेश, रोजगार और निर्यात बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।
सरकार का मानना है कि नई टेक्सटाइल नीति लागू होने के बाद झारखंड न केवल देश के प्रमुख टेक्सटाइल राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाएगा, बल्कि हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।









