23 दिन के अनशन के बाद सोनम वांगचुक ने रखीं 3 बड़ी शर्तें! कहा- इनमें से एक भी पूरी हुई तो तोड़ दूंगा भूख हड़ताल
सफदरजंग अस्पताल से जारी हस्तलिखित पत्र में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा कि उनकी तीन शर्तों में से कोई एक पूरी होने पर ही वह अपनी भूख हड़ताल समाप्त करेंगे।

नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त करने को लेकर पहली बार स्पष्ट शर्तें सार्वजनिक की हैं। सोमवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जारी एक हस्तलिखित पत्र में उन्होंने कहा कि उनकी तीन शर्तों में से यदि कोई एक भी पूरी होती है, तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे। साथ ही उन्होंने सफदरजंग अस्पताल में “गैरकानूनी हिरासत” में रखे जाने का आरोप भी लगाया है।
वांगचुक कथित नीट परीक्षा अनियमितताओं, शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे। 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस उन्हें वहां से सफदरजंग अस्पताल ले गई थी, जहां उनका अनशन अब भी जारी है।
क्या हैं सोनम वांगचुक की तीन शर्तें?
अपने पत्र में वांगचुक ने कहा कि वह 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त कर देंगे, यदि इनमें से कोई एक शर्त पूरी होती है—
- पहली शर्त: केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल की विफलताओं, विशेषकर प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार करे।
- दूसरी शर्त: सांसद और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता यह भरोसा दें कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को संसद में मजबूती से उठाया जाएगा।
- तीसरी शर्त: यदि स्वास्थ्य कारणों से अनशन जारी रखना संभव न रहे, तो विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता अस्पताल पहुंचकर लिखित या स्पष्ट आश्वासन दें कि वे इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे।
‘गैरकानूनी हिरासत’ का लगाया आरोप
19 जुलाई की तारीख वाले पत्र में वांगचुक ने आरोप लगाया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में “गैरकानूनी हिरासत” में रखा गया है, जहां उनकी आवाजाही, अभिव्यक्ति और संचार की स्वतंत्रता पर रोक लगी हुई है।

‘संसद मार्च’ से पहले आया संदेश
वांगचुक का यह संदेश ऐसे समय आया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन ‘संसद मार्च’ का आह्वान किया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस मार्च की अनुमति नहीं दी है। इसके बावजूद जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में समर्थक जुटे हुए हैं।
पत्नी ने भी दोहराई थी यही मांग
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने भी रविवार को कहा था कि यदि राजनीतिक दल शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही के मुद्दे को संसद में उठाने का भरोसा देते हैं, तो उनके पति अपना अनशन समाप्त कर देंगे।
हाई कोर्ट ने क्या कहा था?
इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट में सोनम वांगचुक को अस्पताल से छुट्टी दिलाने की याचिका दायर की गई थी। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि “हर जीवन मूल्यवान है”, लेकिन अस्पताल से छुट्टी का फैसला मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर ही लिया जाएगा।








