SIDE EFFECT : इस मछली के खाने से कैंसर- डायबिटीज तक का होने का रहता है खतरा

हेल्थ टिप्स : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और भारत सरकार ने वर्ष 2000 में विदेशी थाई मछली पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद खुलेआम थाई मछली बेची और खरीदी जा रही है। सिर्फ लोहरदगा जिले के शहरी क्षेत्र के चेकनाका से लेकर ब्लॉक मोड़ तक आधा दर्जन स्थानों पर सड़क के किनारे इस मछली की बिक्री हो रही है।
सेहत के लिए बेहद खतरनाक थाई मांगुर
जिला प्रशासन के नाक के नीचे खुलेआम इस तरीके से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और केंद्र सरकार के आदेश की धज्जियां उड़ाई जा रही है, महत्वपूर्ण बात यह है कि थाई मांगुर प्रजाति की मछली स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
मांस खाती है थाई मांगुर मछली
मांगुर मछली पर प्रतिबंध लगाने के पीछे इससे होने वाला पर्यावरण और स्वास्थ्य को नुकसान है। मांगुर मछली के खाने से कैंसर, डायबिटीज और कई गंभीर रोग हो सकते हैं। यह मछली मांस खाती है, जिसकी वजह से इसका शरीर बहुत तेजी से बढ़ता है।
मांगुर मछली में आयरन और लेड बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है, जिसके कारण यह इंसान और पर्यावरण दोनों के लिए खतरनाक है। कहा जाता है कि मांगुर मछली जिस तालाब या जलाशय में रहती है, वहां दूसरी प्रजाति की एक भी मछली या कीड़े-मकोड़े तक नहीं बचते। यह मछली दूसरी मछलियों को भी अपना शिकार बनती है।
फिर भी बंगाल के रास्ते लोहरदगा तक और राज्य के अलग-अलग जिलों में भी अवैध तरीके से इसका कारोबार विदेशी मांगुर मछली को देसी मांगुर बताकर बाजारों में बेचा जाता है। लोग बड़े शौक से इस मछली को खाते हैं।












