नसबंदी के दौरान ईनामी घोड़े राजा की मौत के बाद हंगामा, मालिक का आरोप- डॉक्टर ने दिया एनेस्थीसिया का ओवरडोज

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में एक दुखद घटना घटी, जिसमें एक मूल्यवान घोड़ा “राजा” नसबंदी के दौरान मृत हो गया. इस घटना के बाद घोड़े के मालिक ने डॉक्टरों पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी वजह से घोड़े को एनेस्थीसिया का ओवरडोज दिया गया. हालांकि, डॉक्टरों ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है.

घोड़े की नसबंदी का मामला

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

यह घटना 30 दिसंबर, 2024 को घटित हुई, जब राजा के मालिक, प्रफुल्ला सोनकर, ने अपनी घोड़ी “राजा” को 28 दिसंबर को कमजोरी महसूस होने के बाद एक पशु चिकित्सा अस्पताल में दाखिल कराया था. अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें घोड़े की नसबंदी करवाने की सलाह दी. प्रफुल्ला ने डॉक्टरों की सलाह मानी और नसबंदी के ऑपरेशन के लिए 30 दिसंबर की तारीख तय की. ऑपरेशन से पहले घोड़े को टेटनस का इंजेक्शन भी दिया गया था.

ऑपरेशन के बाद होश में नहीं आया घोड़ा
जबलपुर में एक प्राइवेट पशु चिकित्सा अस्पताल में घोड़े की नसबंदी की प्रक्रिया शुरू हुई. ऑपरेशन के दौरान प्रफुल्ला और उनके परिवार के सदस्य ऑपरेशन थियेटर के बाहर इंतजार कर रहे थे. ऑपरेशन लगभग 50 मिनट तक चला, लेकिन जब ऑपरेशन खत्म हुआ, घोड़ा होश में नहीं आया और दुर्भाग्यवश उसकी मौत हो गई. प्रफुल्ला ने दावा किया कि ऑपरेशन सिर्फ 15 मिनट में पूरा हो गया था और उसे लगता है कि घोड़े को 60 मि.ली. की बजाय 120 मि.ली. एनेस्थीसिया दिया गया था, जिससे घोड़े की मौत हो गई.

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

अस्पताल की सफाई
प्रफुल्ला सोनकर ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने घोड़े को एनेस्थीसिया का ओवरडोज दिया, जबकि केवल 60 मि.ली. की आवश्यकता थी. इसके अलावा, प्रफुल्ला ने कहा कि यह ऑपरेशन बहुत जल्दबाजी में किया गया था और घोड़े की मौत के कारण उसे भारी वित्तीय नुकसान हुआ है. प्रफुल्ला ने घोड़े की मौत के कारण अस्पताल से मुआवजे की मांग की, क्योंकि उन्होंने राजा को लगभग 2.5 लाख रुपए में खरीदा था और उसे शादी समारोहों में इस्तेमाल करते थे. घोड़े के मालिक और उनके परिवार ने अस्पताल में हंगामा किया, जिससे पुलिस को घटनास्थल पर बुलाया गया. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं.

पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. इस बीच, अस्पताल ने अपने स्तर पर सफाई दी है और दावा किया है कि घोड़े की मौत का कारण ओवरडोज नहीं था. डॉक्टरों ने कहा है कि एनेस्थीसिया की खुराक को सावधानीपूर्वक तय किया गया था और सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के अनुसार की गईं.

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

यह मामला पशु चिकित्सा प्रक्रिया के दौरान संभावित लापरवाही और गलत दवाओं के इस्तेमाल पर सवाल खड़ा करता है, जो अब जांच के दायरे में है.

Related Articles

close