इस बार पुत्र की लंबी आयु के लिए व्रती दो दिन करेंगी जिउतिया का व्रत, जानें क्या है व्रत-पारण का समय

रांची: अपने पुत्र-पुत्रियों की लंबी आयु के लिए माताएं दो दिन जिउतिया व्रत करेंगी। जिउतिया का व्रत इस बार दो दिनों का होगा। मिथिला पंचांग के अनुसार 17 सितंबर को जिउतिया और 18 सितंबर की शाम 4.50 बजे के बाद पारण होगा। इस प्रकार व्रती 34.50 घंटे तक निर्जला व्रत का उपवास करेंगी।

वहीं बनारस पंचांग के अनुसार 18 सितंबर को जिउतिया का व्रत व्रती करेंगी। व्रती 19 सितंबर को सूर्योदय के बाद पारण कर व्रत को संपन्न करेंगी। ऐसे में बनारसी पंचांग के अनुसार व्रती 24 घंटों का व्रत रखेंगी। आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि 17 सितंबर शनिवार की शाम 3.05 बजे से आरंभ होकर 18 सितंबर रविवार की शाम 4.49 बजे तक है। वहीं 17 सितंबर को देवशिल्पी विश्वकर्मा का प्राकट्य उत्सव, रोहिणी व मृगशिरा नक्षत्र में होगी। जिउतिया के व्रत में कुश से जीमूतवाहन की मूर्ति बना कर पूजा करने के बाद व्रती जीमूतवाहन की कथा सुनकर पंडितोंं को दक्षिणा प्रदान करेंगी।

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  • मिथिला पंचांग के अनुसार 17 तो बनारसी पंचांग के अनुसार 18 सितंबर को व्रत
  • 17 सितंबर को देवशिल्पी विश्वकर्मा की पूजा

मड़ुआ रोटी, नोनी साग के सेवन की महत्ता

व्रत के एक दिन पूर्व व्रती गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद मडुआ रोटी, नोनी की साग, कंदा, झिंगी, करमी आदि का सेवन करेंगी। व्रती स्नान करने के बाद भोजन करेंगी। मडुआ और नोनी साग उसर भूमि में भी उपजता है। ऐसे में मान्यता है कि उनकी संतान की सभी प्रकार से रक्षा होगी। जिस प्रकार नोनी का साग दिनों-दिन विकास करता है उसी प्रकार उनके वंश में भी वृद्धि होती है।

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