झारखंड: पुलिस और CRPF के संयुक्त ऑपरेशन में मिली बड़ी सफलता…25 लाख का इनामी नक्सली आखिरकार दबोचा गया….हत्या, IED ब्लास्ट, सुरक्षाबलों पर हमले और लेवी वसूली के दर्जनों मामलों में था वांछित…

गिरिडीह।
झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। गिरिडीह पुलिस और CRPF की कोबरा-209 बटालियन के संयुक्त अभियान में 25 लाख रुपये का इनामी माओवादी कमांडर अजय महतो उर्फ मोछू उर्फ टाइगर को गिरफ्तार कर लिया गया है। वह प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन की स्पेशल एरिया कमेटी (SAC) का सदस्य था और लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था।
पुलिस के मुताबिक, अजय महतो पर हत्या, IED विस्फोट, सुरक्षाबलों पर घात लगाकर हमले, लेवी वसूली और अन्य नक्सली गतिविधियों समेत 240 से अधिक मामले दर्ज हैं। झारखंड के अलावा बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ की पुलिस भी उसकी तलाश कर रही थी।
17 जुलाई की खुफिया सूचना बनी गिरफ्तारी की वजह
पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार ने बताया कि राज्य में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान के दौरान 17 जुलाई 2026 को खुखरा थाना क्षेत्र के हरलाडीह ओपी के जंगलों में नक्सलियों की मौजूदगी की सटीक खुफिया सूचना मिली थी।
इसके बाद पुलिस और CRPF के कमांडेंट सौरभ भटनागर के नेतृत्व में संयुक्त अभियान चलाया गया। सुरक्षा बलों ने ग्राम पिपराडीह (खवासटांड टोला) के घने जंगलों की घेराबंदी की। इसी दौरान भागने की कोशिश कर रहे अजय महतो को गिरफ्तार कर लिया गया।
2005 से नक्सली संगठन में था सक्रिय
पुलिस के अनुसार, अजय महतो वर्ष 2005 से माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ था। समय के साथ संगठन में उसका कद बढ़ता गया और वह लेवी वसूली, हथियारों के नेटवर्क, IED लगाने और बड़ी नक्सली साजिशों को अंजाम देने में सक्रिय भूमिका निभाने लगा।
जांच एजेंसियों का दावा है कि उस पर पुलिस मुखबिरी के शक और लेवी नहीं देने के आरोप में कई ग्रामीणों की निर्मम हत्या करने के भी आरोप हैं। इसके अलावा सड़क निर्माण कार्यों में लगे ठेकेदारों से रंगदारी वसूलना भी उसके नेटवर्क का हिस्सा था।
कई राज्यों की पुलिस के लिए बना था सिरदर्द
अजय महतो उर्फ मोछू, टाइगर, अंजन दा, बुधराम, श्रीकांत और बासुदेव जैसे कई नामों से सक्रिय था। वह गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के नावाडीह का निवासी है और दो दशक से अधिक समय से नक्सली गतिविधियों में शामिल था।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी से झारखंड समेत आसपास के राज्यों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। अब उससे पूछताछ के आधार पर संगठन के अन्य सदस्यों और उनकी गतिविधियों से जुड़े महत्वपूर्ण खुलासे होने की उम्मीद है।









