BREAKING: अनशन तोड़ने को तैयार सोनम वांगचुक…अस्पताल से सरकार को शर्त भरी लिखी चिट्ठी…

मेदांता अस्पताल से केंद्रीय मंत्रियों को पत्र लिखकर सोनम वांगचुक ने कहा- सरकार लिखित आश्वासन दे, तभी खत्म करूंगा अनशन। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे समेत कई मांगें दोहराईं।

नई दिल्ली: पिछले 25 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने पहली बार अनशन समाप्त करने को लेकर अपनी शर्तें सार्वजनिक की हैं। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से उन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर कहा है कि यदि सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन देती है, तो वह अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे।

मंगलवार देर रात सोनम वांगचुक को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया था। अस्पताल में दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने उनसे मुलाकात कर स्वास्थ्य का हाल जाना और भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की थी।

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अनशन खत्म करने के लिए रखीं ये शर्तें

सोनम वांगचुक ने अपने पत्र में कहा है कि जब तक प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई न करने की लिखित गारंटी नहीं दी जाती, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर कार्रवाई नहीं होती और पेपर लीक प्रकरण के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा नहीं दिया जाता, तब तक वह अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे।

उन्होंने यह भी मांग की कि इन मुद्दों पर संसद में चर्चा हो और सरकार स्पष्ट रुख अपनाए। वांगचुक ने कहा कि यदि उनकी सभी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है, तो वह अपनी भूख हड़ताल खत्म करने के लिए तैयार हैं।

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केंद्रीय मंत्रियों का जताया आभार

अपने पत्र में सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह का अस्पताल आकर मुलाकात करने के लिए धन्यवाद भी दिया। उन्होंने लिखा कि चर्चा के दौरान मंत्रियों ने उनकी मांगों पर सरकार द्वारा सकारात्मक विचार किए जाने का आश्वासन दिया है।

‘ठोस आश्वासन मिलेगा तभी खत्म होगा अनशन’

सोनम वांगचुक ने पत्र में यह भी कहा कि ‘चलो संसद’ मार्च शांतिपूर्ण रहा, लेकिन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर उन्होंने चिंता जताई। उनका कहना है कि जब तक सरकार की ओर से ठोस और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी। हालांकि, यदि उनकी शर्तें स्वीकार कर ली जाती हैं तो वह अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं।

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