वीडियो: पुरानी पेंशन अभिवादन समारोह में पहुंचे राज्यभर के कर्मचारी.. “हेमंत सोरेन जिंदाबाद” के नारों से गुंजायमान हुई राजधानी..

रांची पुरानी पेंशन बहाल क्या हुई मानो पूरे राज्य में होली दिवाली आ गई। सभी राज्य कर्मी अपने अपने कार्यालय में अवकाश लेकर मुख्यमंत्री के अभिवादन समारोह में पहुंचे।

अभिवादन समारोह में राज्य कर्मी

झारखंड के 24 जिलों के अलग अलग विभाग के कर्मचारी राजधानी रांची पहुंचे। राज्य भर के कर्मचारियों से राजधानी का हर एक सड़क पट गया। कर्मचारियों के खुशी उसके चेहरे बता रहे थे।

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हर कर्मी का उत्साह ये बता रहा था की न सिर्फ पुरानी पेंशन मिली बुढ़ापे का सहारा भी मिल गया। अपने बुढ़ापे में जिंदगी गुजारने का सारी टेंशन खत्म हो गई। ऐसे में नाम था तो सिर्फ और सिर्फ हेमंत सोरेन का….

जश्न में शरीक राज्य कर्मचारी

….हो भी क्यों न? जिस जिंदादिली के साथ 26 जून की पेंशन जयघोष महारैली में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के तमाम कर्मचारियों के बीच एक वायदा किया था उसे वर्तमान राजनीतिक उठापटक के बीच 26 जून को किए गए वायदे को पूर्ण किया। जिस पर हेमंत सोरेन की पूरी कैबिनेट ने मुहर लगाई।

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पुरानी पेंशन पर मुहर लगाकर साफ संदेश दिया कि कर्मचारी हित की बात सोचने वाला महागठबंधन की सरकार है। अभिवादन समारोह को विरोधी दल पचा नहीं पा रहे हैं। तरह तरह के बयान बाजी आए दिन मीडिया में हैं।

इन तमाम तरह की अटकलों के बीच हेमंत सोरेन ने साफ कहा है कर्मचारियों के हित की बात सोचना राज्य सरकार का काम है, ना कि केंद्र सरकार का।

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जो सरकारी कर्मचारी पूरी जिंदगी राज्य की सेवा करते हैं उन्हें यह सौगात मिलनी ही चाहिए और उसे हमारी सरकार ने पूरा कर दिखाया।

हर तरफ गूंजा सिर्फ एक ही नाम -हेमंत सोरेन जिंदाबाद

कर्मचारियों का उत्साह इस कदर था की प्रशासन को यातायात की विधि व्यवस्था संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी हर सड़कों पर जाम लगा हुआ था सड़कों पर गाड़ियां रेंगती भी नजर आई।

हर तरफ रंग गुलाल लगे चेहरे, नाच गाने, ढोल नगाड़े, संगीत के बीच झूमते राज्य कर्मी ये बयां करने को काफी थे की पुरानी पेंशन मिलने की खुशी क्या होती है। इस बीच सिर्फ और सिर्फ एक ही नाम हेमंत सोरेन जिंदाबाद….हेमंत सोरेन जिंदाबाद.. हेमंत सोरेन जिंदाबाद

नारों की गूंज ऐसी थी की जिधर से भी अभिवादन जुलूस निकला अनायास ही घरों में रहने वाले सभी लोग बाहर निकलने को मजबूर हो गए, लोग मकानों की छत से, कार्यालय की खिड़कियों से, सड़कों पर चलने वाले राहगीर अपनी वाहनों को रोककर इस उत्साह की रैली में भागीदार बनें।

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