बंगाल की सियासत का फैसला आज, 142 सीटों पर वोटिंग के बीच चौंकाने वाले आंकड़े, भवानीपुर में टिकी सांसें
दोपहर तक 61 फीसदी से ज्यादा मतदान, बड़े चेहरों की किस्मत दांव पर, कई सीटों पर कांटे की टक्कर

पश्चिम बंगाल में सियासी हलचल अपने चरम पर है। विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण के तहत आज 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान जारी है। सात जिलों में फैले करीब 3.21 करोड़ मतदाता 1,448 उम्मीदवारों के भविष्य का फैसला करने के लिए मतदान केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। दोपहर 1 बजे तक राज्य में 61.11 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो इस बात का संकेत दे रहा है कि मुकाबला बेहद कड़ा और निर्णायक होने वाला है।
इस चरण को सबसे अहम माना जा रहा है क्योंकि यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रतिष्ठा सीधे तौर पर दांव पर लगी हुई है। उनके साथ ही राज्य सरकार के कई प्रभावशाली मंत्रियों का राजनीतिक भविष्य भी आज की वोटिंग पर निर्भर है। कोलकाता और आसपास के इलाकों में जहां तृणमूल कांग्रेस का दबदबा रहा है, वहीं इस बार भाजपा और माकपा ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाकर सियासी समीकरणों को उलझा दिया है।
अगर जिलावार मतदान प्रतिशत पर नजर डालें तो पूर्व बर्धमान में सबसे ज्यादा 66.80 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई है, जबकि हुगली में 64.57 प्रतिशत और नदिया में 61.41 प्रतिशत मतदान हुआ है। हावड़ा में 60.68 प्रतिशत, कोलकाता उत्तर में 60.18 प्रतिशत और उत्तर 24 परगना में 59.20 प्रतिशत वोटिंग हुई है। वहीं दक्षिण 24 परगना में 58.58 प्रतिशत और कोलकाता दक्षिण में 57.73 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
इस चरण की सबसे चर्चित सीट भवानीपुर बनी हुई है, जहां से खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव मैदान में हैं। उनके सामने भाजपा के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। दोपहर 1 बजे तक यहां 58.53 प्रतिशत मतदान हो चुका है, जिससे साफ है कि जनता का रुझान इस सीट पर खासा दिलचस्प बना हुआ है।
इसके अलावा कई वीआईपी सीटों पर भी आज मतदान हो रहा है। फिरहाद हकीम कोलकाता पोर्ट से, अरूप विश्वास टॉलीगंज से, शशि पांजा श्यामपुकुर से और ब्रात्य बसु दमदम सीट से अपनी साख बचाने के लिए मैदान में हैं। इन सीटों पर मुकाबला इतना कड़ा है कि नतीजों को लेकर अभी से अटकलों का दौर शुरू हो गया है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। हर वोट के साथ सस्पेंस और भी गहराता जा रहा है, क्योंकि यही फैसला करेगा कि बंगाल की सत्ता अगले पांच साल किसके हाथ में जाएगी।












