झारखंड: 20000 रुपये घूस लेते कर्मचारी को ACB ने किया था गिरफ्तार, अब स्पेशल कोर्ट ने भी घूसखोर कर्मचारी को दिया बड़ा झटका…

Jharkhand: ACB arrested an employee for taking a bribe of Rs 20,000. Now, the special court has dealt a major blow to the bribe-taking employee.

घूस लेते गिरफ्तार हुए कर्मचारी की मुश्किले खत्म नहीं हुई है। एसीबी की विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। राहुल प्रताप को एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने ठेकेदार से 20 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
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Court News : गुमला जिले में घूसखोरी के आरोप में गिरफ्तार लघु सिंचाई विभाग के अकाउंटेंट राहुल प्रताप की मुश्किलें बढ़ गयी है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले के बाद राहुल प्रताप को अभी जेल में ही रहना होगा।आपको बता दें कि राहुल प्रताप ने 18 फरवरी को अदालत में जमानत याचिका दाखिल करते हुए रिहाई की मांग की थी।

विशेष अदालत ने उनकी याचिका को अस्वीकार कर दिया। अदालत ने माना कि मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल जमानत देना उचित नहीं है। दरअसल, राहुल प्रताप गुमला जिले के लघु सिंचाई कार्यालय में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक ठेकेदार से बिल पास कराने और संबंधित कार्यों में सुविधा देने के बदले 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।

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शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने इस मामले की जांच शुरू की और आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए योजना बनाई थी। एसीबी की नौ सदस्यीय टीम ने पूरे मामले की निगरानी करते हुए जाल बिछाया। तय योजना के अनुसार जब ठेकेदार ने राहुल प्रताप को 20 हजार रुपये दिए, उसी दौरान एसीबी की टीम ने मौके पर पहुंचकर उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

यह कार्रवाई गुमला स्थित लघु सिंचाई कार्यालय परिसर में की गई, जिससे वहां कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने आरोपी से पूछताछ की और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसके बाद राहुल प्रताप ने अदालत में जमानत याचिका दाखिल कर राहत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया।

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जानकारी के अनुसार, 31 जुलाई 2025 को राहुल प्रताप का स्थानांतरण गुमला से लोहरदगा कर दिया गया था। हालांकि, कार्यपालक अभियंता द्वारा उन्हें औपचारिक रूप से विरमित नहीं किया गया था। इस कारण वे गुमला के लघु सिंचाई कार्यालय से जुड़े कार्यों का ही निष्पादन कर रहे थे। इसी दौरान उनके खिलाफ रिश्वत लेने की शिकायत सामने आई और एसीबी ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

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