झारखंड : हाथियों के रास्ते में अब नहीं जाएगी जान, आपके जिले में बनने जा रहा है रेस्क्यू सेंटर

No more elephants losing their lives, a rescue centre is coming up in your district.

झारखंड मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए वन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के 18 जिलों के वन प्रमंडलों में एलिफेंट रेस्क्यू सेंटर बनाए जाएंगे। इन केंद्रों से जंगली हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। प्रधान मुख्य वन संरक्षक के अनुसार, प्रदेश में करीब 680 हाथी हैं। उनकी सुरक्षा और लोगों की जान बचाने के लिए हाथियों के कॉरिडोर को निर्बाध बनाने की तैयारी की जा रही है।

हाल के महीनों में झारखंड मानव-हाथी संघर्ष ने गंभीर रूप ले लिया है। जनवरी और फरवरी में कम से कम 25 लोगों की मौत हो चुकी है। चाईबासा में 21 लोगों ने जान गंवाई। वहीं हजारीबाग, गिरिडीह और बोकारो में भी हमलों की घटनाएं सामने आईं। हाल ही में एक हाथी झुंड से बिछड़कर रांची शहर में घुस आया था और हटिया व बिरसा चौक के आसपास कई घंटों तक घूमता रहा। वन विभाग और पुलिस की टीम ने उसे सुरक्षित जंगल की ओर खदेड़ा।

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विशेषज्ञों का मानना है कि अनियमित शहरीकरण, खनन, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे लाइन विस्तार ने हाथियों के पारंपरिक मार्ग बाधित कर दिए हैं। पहले हाथियों का झुंड झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ तक तय मार्ग से आवागमन करता था। अब जंगलों की कटाई और भोजन की कमी के कारण वे आबादी वाले इलाकों में पहुंच जाते हैं।

वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि हाथियों के पास न जाएं, फोटो या वीडियो न बनाएं। खासकर युवा नर हाथी इस मौसम में अधिक आक्रामक हो सकते हैं। उम्मीद है कि झारखंड मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए उठाए गए ये कदम जल्द असर दिखाएंगे।

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