झारखंड वेतन घोटाला: ट्रेजरी अफसरों पर शिकंजा, जांच में खुल रहे चौंकाने वाले राज

रांची से बड़ी अपडेट: जांच की आंच अब ट्रेजरी अफसरों तक पहुंची

झारखंड में बोकारो और हजारीबाग से जुड़े वेतन घोटाले की जांच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है, नए और गंभीर खुलासे सामने आ रहे हैं। अब इस मामले में ट्रेजरी अफसर भी जांच के घेरे में आ गए हैं। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि अस्थायी पे आईडी को ट्रेजरी स्तर पर मंजूरी मिलने के बाद ही अप्रूव किया गया था, जिससे अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं।

2014 से चल रहा खेल: 30 करोड़ से ज्यादा की अवैध निकासी का दावा
हजारीबाग ट्रेजरी घोटाले के मुख्य आरोपी शंभु कुमार ने पूछताछ के दौरान बड़ा खुलासा किया है। उसके अनुसार वर्ष 2014 से अब तक 30 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी की गई। यह आंकड़ा इस घोटाले की गंभीरता को साफ तौर पर दर्शाता है।

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बोकारो में भी करोड़ों की हेराफेरी, हर महीने होती थी भारी निकासी
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक बोकारो मामले में अब तक 3.15 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की पुष्टि हो चुकी है। आरोपी ने यह भी बताया कि हर महीने 40 से 50 लाख रुपये तक की फर्जी निकासी नियमित रूप से की जाती थी।

फर्जी पे आईडी का जाल: चार से बढ़कर 31 खातों तक पहुंचा नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि घोटाले की शुरुआत महज चार अस्थायी पे आईडी से हुई थी। इसके बाद धीरे धीरे नेटवर्क का विस्तार करते हुए इसे 9 और फिर 31 खातों तक पहुंचा दिया गया। नए नियुक्त कर्मियों के नाम पर अस्थायी पे आईडी बनाकर उसमें अधिक राशि दिखाकर सरकारी खजाने से पैसे निकाले जाते थे।

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परिवार के खातों में जाता था पैसा, रिश्तेदार बने माध्यम
जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि निकाली गई रकम आरोपी के करीबी रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर की जाती थी। इसमें उसकी पत्नी काजल, बहन संगीता चौधरी और रिश्तेदार राकेश चौधरी के बैंक खाते शामिल हैं। इस तरीके से रकम को ट्रैक करना मुश्किल बनाया गया।

सिस्टम की खामियों का उठाया फायदा, संगठित तरीके से रचा गया खेल
आरोपी ने स्वीकार किया कि वर्ष 2013 में लेखा शाखा में पदस्थापना के दौरान उसने सिस्टम की कमजोरियों को समझा। इसके बाद उसने योजनाबद्ध तरीके से फर्जी पे आईडी तैयार करना, जीपीएफ डेटा में छेड़छाड़ करना और अवैध निकासी को अंजाम देना शुरू किया।

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अब आगे क्या: जांच एजेंसियां और कड़ी कार्रवाई की तैयारी में
इस पूरे मामले में अब ट्रेजरी अफसरों की भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं और कई अन्य लोगों की संलिप्तता भी सामने आ सकती है।

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