Maternity Leave India: 2 बच्चों के बाद मैटरनिटी लीव का क्या है नियम? तीसरे बच्चे पर छुट्टी घटती है या हो जाती है बंद, जानिए पूरा कानून

Maternity Leave India: नौकरीपेशा महिलाओं के लिए मैटरनिटी लीव सिर्फ छुट्टी नहीं, बल्कि गर्भावस्था, प्रसव और नवजात की देखभाल से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कानूनी अधिकार है। लेकिन क्या हर बच्चे के जन्म पर महिला को एक जैसी छुट्टी मिलती है? क्या तीसरे बच्चे के बाद मैटरनिटी लीव का नियम बदल जाता है? इन सवालों ने एक बार फिर चर्चा पकड़ ली है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद उन महिलाओं के लिए मैटरनिटी लीव के नियमों पर ध्यान गया है, जिनके पहले से दो या उससे अधिक जीवित बच्चे हैं। हालांकि, मैटरनिटी लीव के नियम महिला की नौकरी और उस पर लागू कानून या सर्विस रूल्स के आधार पर अलग हो सकते हैं।

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पहले दो बच्चों के लिए 26 हफ्ते की छुट्टी

मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत पात्र महिला को पहले दो जीवित बच्चों के जन्म के मामले में 26 हफ्ते तक की पेड मैटरनिटी लीव मिल सकती है। इसका उद्देश्य महिला को गर्भावस्था, प्रसव और प्रसव के बाद स्वास्थ्य लाभ के लिए पर्याप्त समय देना है। साथ ही इस दौरान मां को नवजात की देखभाल का अवसर भी मिलता है।

लेकिन दो जीवित बच्चों के बाद नियम बदल जाता है।

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तीसरे बच्चे पर कितनी मैटरनिटी लीव?

मातृत्व लाभ अधिनियम के सामान्य प्रावधानों के अनुसार, यदि महिला के पहले से दो या उससे अधिक जीवित बच्चे हैं, तो बाद के बच्चे के जन्म पर मैटरनिटी लीव की अवधि 12 हफ्ते होती है।

यानी तीसरे बच्चे के मामले में मैटरनिटी लीव पूरी तरह खत्म नहीं होती, बल्कि सामान्य नियम के तहत 26 हफ्ते की जगह 12 हफ्ते की छुट्टी का प्रावधान होता है।

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लेकिन सरकारी नौकरी में नियम अलग हो सकते हैं

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। सरकारी कर्मचारियों पर संबंधित सर्विस रूल्स भी लागू होते हैं। इसलिए किसी सरकारी कर्मचारी की मैटरनिटी लीव का अधिकार केवल मातृत्व लाभ अधिनियम देखकर तय नहीं किया जा सकता।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जिस मामले ने इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया, उसमें सरकारी कर्मचारी महिला के पहले से दो जीवित बच्चे थे और उसने इसके बाद मैटरनिटी लीव की मांग की थी। कोर्ट के फैसले में संबंधित सरकारी सेवा नियमों के आधार पर पात्रता का सवाल सामने आया।

इसलिए सरकारी नौकरी करने वाली महिलाओं को अपनी सेवा शर्तों और लागू नियमों को भी देखना जरूरी है।

केंद्र सरकार की महिला कर्मचारियों के लिए क्या नियम?

केंद्र सरकार की महिला कर्मचारी अलग-अलग केंद्रीय सेवा नियमों के तहत आती हैं। केंद्रीय सिविल सेवा नियमों के तहत आम तौर पर महिला सरकारी कर्मचारियों को पहले दो जीवित बच्चों के लिए 180 दिनों की मैटरनिटी लीव का प्रावधान है।

बाद के बच्चों से जुड़े नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए सरकारी कर्मचारी यह मानकर नहीं चल सकती कि निजी क्षेत्र में लागू मातृत्व लाभ के नियम उसी तरह उसकी सरकारी सेवा पर भी लागू होंगे।

क्या मैटरनिटी लीव कानूनी अधिकार है?

भारत में मातृत्व सुरक्षा को महिला की गरिमा, स्वास्थ्य और कार्यस्थल पर समानता से जोड़कर देखा गया है। मातृत्व लाभ से जुड़े कानूनों और सेवा नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के कारण महिला को नौकरी या कार्यस्थल से जुड़े अधिकारों से वंचित न होना पड़े।

हालांकि, मैटरनिटी लीव की अवधि और पात्रता इस बात पर निर्भर करती है कि महिला किस कानून या सेवा नियम के दायरे में आती है और उसके कितने जीवित बच्चे हैं।

मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत कौन पात्र?

मातृत्व लाभ अधिनियम के दायरे में आने वाली पात्र महिला को आम तौर पर मातृत्व लाभ पाने के लिए बच्चे के जन्म की संभावित तारीख से पहले के 12 महीनों में कम से कम 80 दिन काम किया होना जरूरी होता है।

यह कानून कुछ निर्धारित प्रतिष्ठानों और संस्थानों पर लागू होता है, जिनमें कारखाने, खदानें, दुकानें और अन्य ऐसे संस्थान शामिल हैं जो कानून में निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं।

सीधे शब्दों में समझें तो पहले दो जीवित बच्चों के लिए 26 हफ्ते की मैटरनिटी लीव का प्रावधान है, जबकि दो या उससे अधिक जीवित बच्चों के बाद होने वाले बच्चे के लिए सामान्य मातृत्व लाभ नियमों के तहत अवधि 12 हफ्ते हो जाती है। वहीं सरकारी कर्मचारियों के मामले में संबंधित सर्विस रूल्स अलग प्रावधान कर सकते हैं।

इसलिए तीसरे बच्चे के मामले में मैटरनिटी लीव पूरी तरह खत्म हो जाती है, ऐसा सामान्य तौर पर कहना सही नहीं होगा। सही पात्रता महिला की नौकरी, लागू कानून और संबंधित सेवा नियमों को देखकर ही तय होगी।

नोट: इस विषय में कानून/सर्विस रूल्स के अलग-अलग प्रावधान लागू हो सकते हैं, इसलिए इसे प्रकाशित करने से पहले संबंधित हाईकोर्ट के फैसले और लागू सरकारी नियमों के मूल स्रोत से तथ्यों का मिलान करना बेहतर रहेगा।

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