‘एक इस्तीफा हुआ, अब दो और फैसलों का इंतजार’… धर्मेंद्र प्रधान के बाद CJP का ऐलान, जंतर-मंतर से हटने की रखी नई शर्त

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को आंदोलन की पहली जीत बताया, अभिजीत दीपके बोले- मुआवजा, पुलिस कार्रवाई और केस वापसी तक जारी रहेगा धरना

नई दिल्ली। NEET पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय से जारी आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इसे अपनी पहली बड़ी जीत बताया है। हालांकि पार्टी ने साफ कर दिया है कि उनका आंदोलन अभी खत्म नहीं होगा और बाकी मांगें पूरी होने तक प्रदर्शन जारी रहेगा।

‘हमने कर दिखाया’, मंच से बोले अभिजीत दीपके

जंतर-मंतर पर समर्थकों को संबोधित करते हुए CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस बात का प्रमाण है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ बुलंद हो तो सरकार को भी फैसले लेने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को डरने की जरूरत नहीं है और लोकतंत्र में सवाल पूछना हर नागरिक का अधिकार है।

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दीपके ने कहा कि आंदोलन की पहली मांग पूरी हो गई है, लेकिन अभी दो महत्वपूर्ण मांगें बाकी हैं, इसलिए CJP फिलहाल जंतर-मंतर से नहीं हटेगी।

आंदोलन खत्म करने के लिए रखीं ये शर्तें

अभिजीत दीपके ने कहा कि NEET पेपर लीक से जुड़े मामलों में जिन छात्रों ने कथित तौर पर आत्महत्या की, उनके परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए।

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इसके अलावा उन्होंने 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर बल प्रयोग करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मामलों को भी वापस लिया जाना चाहिए।

‘तीनों मांगें लिखित में मानी जाएं, तभी हटेंगे’

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि यह केवल किसी संगठन की नहीं, बल्कि देश के आम नागरिकों और छात्रों की जीत है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनकी सभी मांगों को लिखित रूप में स्वीकार कर लेती है, तभी आंदोलन समाप्त किया जाएगा।

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उन्होंने यह भी घोषणा की कि आंदोलन के समर्थन में देशभर में शाम 6 बजे शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला जाएगा और लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की गई है।

अभी राष्ट्रपति की मंजूरी बाकी

धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति द्वारा इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद ही इसे औपचारिक रूप से प्रभावी माना जाएगा।

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