आज से 5 दिन तक गर्मियों की छुट्टियों पर शिमला में रहेंगी राष्ट्रपति मुर्मू, जानिए कब शुरू हुआ ये ट्रेंड और क्या है इसका इतिहास?
ब्रिटिश दौर से चली आ रही परंपरा आज भी कायम, 5 दिन के शिमला प्रवास पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

नई दिल्ली/शिमला। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 27 अप्रैल से 2 मई तक हिमाचल प्रदेश के शिमला दौरे पर हैं। इस दौरान वह मशोबरा स्थित राष्ट्रपति निवास The Retreat में ठहरेंगी, जो राष्ट्रपति का आधिकारिक ग्रीष्मकालीन आवास है। यहां से वह अपने कई आधिकारिक कार्यों का संचालन भी करेंगी।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर हर साल गर्मियों में राष्ट्रपति शिमला ही क्यों जाते हैं? इसके पीछे एक ऐसा इतिहास छिपा है, जो ब्रिटिश काल से जुड़ा हुआ है और आज भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है।
दरअसल, यह परंपरा 19वीं सदी में शुरू हुई थी, जब भारत पर अंग्रेजों का शासन था। साल 1863 में तत्कालीन वायसराय John Lawrence ने शिमला को भारत की समर कैपिटल घोषित किया था। इसके बाद हर साल गर्मियों के दौरान अंग्रेजी हुकूमत का पूरा प्रशासन मैदानी इलाकों की भीषण गर्मी से बचने के लिए शिमला शिफ्ट हो जाता था।
शिमला की ठंडी जलवायु, शांत वातावरण और पहाड़ी इलाका प्रशासनिक कामकाज के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता था। यही वजह थी कि ब्रिटिश अधिकारियों ने इसे अपने ग्रीष्मकालीन मुख्यालय के रूप में विकसित किया।
आजादी के बाद भले ही अंग्रेज चले गए, लेकिन यह परंपरा खत्म नहीं हुई। आज भी देश के राष्ट्रपति गर्मियों के दौरान कुछ दिन शिमला के ‘द रिट्रीट’ में बिताते हैं। यह न केवल एक प्रशासनिक परंपरा है, बल्कि इतिहास से जुड़ी एक जीवंत विरासत भी है।
राष्ट्रपति का यह दौरा सामान्य दिख सकता है, लेकिन इसके पीछे छिपी कहानी देश के औपनिवेशिक अतीत और आज के लोकतांत्रिक ढांचे के बीच एक दिलचस्प कड़ी को उजागर करती है।












