झारखंड : JPSC परीक्षा पर फिर उठे सवाल…हिंदी अनुवाद की गलतियों ने बढ़ाई अभ्यर्थियों की परेशानी

Questions Raised Once Again Over JPSC Exam... Errors in Hindi Translation Add to Candidates' Woes

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग एक बार फिर विवादों में घिर गया है। हाल ही में आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में प्रश्नपत्र के हिंदी अनुवाद में कई गंभीर त्रुटियां सामने आई हैं, जिससे अभ्यर्थियों में असंतोष बढ़ गया है और परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

शब्दों की गलती ने बदला अर्थ, परीक्षार्थियों में भ्रम की स्थिति
सामान्य अध्ययन पेपर-दो में कई ऐसे शब्द गलत लिखे गए, जिनसे प्रश्नों का अर्थ ही बदल गया। उदाहरण के तौर पर स्थानीय शब्द ‘डोकलो’ को ‘ठोकलो’ और ‘पड़हा’ को ‘परहा’ लिखा गया। इसी तरह ‘सारंडा’ को ‘सारंदा’ कर दिया गया। इन गलतियों के कारण परीक्षा के दौरान कई अभ्यर्थी असमंजस में पड़ गए।

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बार-बार दोहराई जा रही चूक, पहले भी हो चुका है बड़ा विवाद
यह पहला मौका नहीं है जब आयोग पर ऐसी लापरवाही के आरोप लगे हैं। इससे पहले सहायक वन संरक्षक मुख्य परीक्षा में भी 65 से अधिक अनुवाद संबंधी गलतियां सामने आई थीं। उस समय भी अभ्यर्थियों ने कड़ी आपत्ति जताई थी, लेकिन कोई ठोस सुधार नहीं दिखा।

मॉडरेशन और प्रूफ रीडिंग पर उठे गंभीर सवाल
परीक्षा प्रक्रिया में प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद मॉडरेशन और प्रूफ रीडिंग अनिवार्य होती है, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि को रोका जा सके। लेकिन लगातार हो रही गलतियों ने इस पूरी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि इतनी अहम परीक्षा में इस तरह की लापरवाही अस्वीकार्य है।

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अभ्यर्थियों का गुस्सा, बोले क्या अब अनुमान से लिखें उत्तर
परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी उमेश कुमार ने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्था तो ठीक रही, लेकिन प्रश्नपत्र की गुणवत्ता बेहद निराशाजनक रही। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब परीक्षार्थियों को सही उत्तर के बजाय अनुमान के आधार पर जवाब देना होगा।

आयोग की चुप्पी बनी बड़ी चिंता, नहीं आया कोई आधिकारिक बयान
अब तक इस पूरे मामले पर झारखंड लोक सेवा आयोग की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। इससे अभ्यर्थियों की नाराजगी और बढ़ गई है। वे मांग कर रहे हैं कि आयोग तुरंत स्थिति स्पष्ट करे और भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के लिए ठोस कदम उठाए।

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