23 लोगों ने किया अत्याचार, फिर ऐसा बदला कि कांप उठा पूरा इलाका! 32 साल पहले आई इस फिल्म ने दिखाई थी फूलन देवी की दर्दनाक कहानी
अपमान, शोषण और संघर्ष से लेकर संसद तक का सफर; फूलन देवी के जीवन पर बनी फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ ने दुनिया भर में बटोरी थी सुर्खियां

नई दिल्ली। भारतीय इतिहास की सबसे चर्चित और विवादित महिलाओं में शामिल फूलन देवी की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। बचपन में शादी, लगातार अपमान, शोषण और हिंसा झेलने के बाद उन्होंने ऐसा रास्ता चुना जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। उनकी जिंदगी के इन्हीं उतार-चढ़ावों को बड़े पर्दे पर उतारा गया था और यह फिल्म आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में गिनी जाती है।
दर्द और संघर्ष से भरा था बचपन
Phoolan Devi का जन्म 10 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव घूरा का पुरवा में हुआ था। कम उम्र में ही उनकी शादी उनसे काफी बड़े उम्र के व्यक्ति से कर दी गई। इसके बाद उनके जीवन में संघर्षों और प्रताड़नाओं का सिलसिला शुरू हो गया।
विभिन्न विवरणों के अनुसार, उन्हें सामाजिक भेदभाव, उत्पीड़न और हिंसा का सामना करना पड़ा। बाद में उनका नाम डकैतों के गिरोहों और उत्तर भारत की सबसे चर्चित आपराधिक घटनाओं से जुड़ गया।
बदले की कहानी ने बनाया राष्ट्रीय चेहरा
फूलन देवी की जिंदगी का सबसे चर्चित अध्याय Behmai massacre से जुड़ा माना जाता है। इस घटना ने उन्हें पूरे देश में सुर्खियों में ला दिया। इसके बाद उन्होंने 1983 में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया और कई वर्षों तक जेल में रहीं।
करीब 11 साल जेल में बिताने के बाद उनकी रिहाई हुई और उन्होंने राजनीति का रास्ता चुना।
डकैत से सांसद तक का सफर
रिहाई के बाद फूलन देवी राजनीति में सक्रिय हुईं और Samajwadi Party में शामिल हुईं। उन्होंने Mirzapur से चुनाव जीतकर संसद तक का सफर तय किया। हालांकि 2001 में उनकी हत्या कर दी गई, जिसके साथ उनके जीवन का एक और विवादास्पद अध्याय समाप्त हो गया।
फिल्म जिसने दुनिया का ध्यान खींचा
फूलन देवी के जीवन पर निर्देशक Shekhar Kapur ने 1994 में Bandit Queen बनाई। यह फिल्म लेखिका Mala Sen की पुस्तक India’s Bandit Queen: The True Story of Phoolan Devi पर आधारित थी।
फिल्म ने भारतीय सिनेमा में यथार्थवादी कहानी कहने की नई पहचान बनाई। इसी फिल्म ने Manoj Bajpayee, Gajraj Rao और Saurabh Shukla जैसे कलाकारों को भी व्यापक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
राष्ट्रीय पुरस्कार से हुई सम्मानित
रिलीज के बाद Bandit Queen को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली। फिल्म ने हिंदी में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी जीता और भारतीय सिनेमा की यादगार फिल्मों में अपना नाम दर्ज कराया।
फूलन देवी की कहानी आज भी संघर्ष, प्रतिशोध, विवाद और सामाजिक असमानता पर होने वाली चर्चाओं के केंद्र में बनी हुई है। उनकी जिंदगी पर बनी फिल्म को भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है।









