बड़ा फैसला! 21 मौतों के बाद हिली दिल्ली सरकार…अब बंद होगी वो स्कीम…लाइसेंस से चार गुना ज्यादा कमरे चलाने का खुलासा, सरकार ने शुरू की सख्त जांच

दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, बंद होगी वो स्कीम जिसने छीनी 21 जिंदगियां, जानें बेड एंड ब्रेकफास्ट लाइसेंस का कांग्रेस से क्या कनेक्शन?

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में एक भीषण अग्निकांड में 21 लोगों की मौत के बाद सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। मालवीय नगर स्थित एक होटल में लगी आग ने न सिर्फ कई परिवारों को उजाड़ दिया, बल्कि एक ऐसी योजना पर भी सवाल खड़े कर दिए, जिसे कभी सुरक्षित और किफायती ठहरने के विकल्प के तौर पर शुरू किया गया था। अब दिल्ली सरकार ने बेड एंड ब्रेकफास्ट (BnB) स्कीम को आधिकारिक रूप से वापस लेने का फैसला कर लिया है।

पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने घोषणा करते हुए कहा कि इस योजना के तहत लाइसेंस प्राप्त सभी प्रतिष्ठानों की व्यापक जांच की जाएगी। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी होगी। इस फैसले के बाद राजधानी में संचालित सैकड़ों रजिस्टर्ड यूनिट्स की गतिविधियां जांच के दायरे में आ गई हैं।

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21 लोगों की मौत के बाद खुला चौंकाने वाला राज

मालवीय नगर के ‘फ्लोरिश स्टे बीएंडबी’ में लगी भीषण आग में 11 विदेशी नागरिकों समेत 21 लोगों की जान चली गई थी। हादसे की जांच में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने प्रशासन को भी हैरान कर दिया।

जानकारी के अनुसार इस प्रतिष्ठान को वर्ष 2024 में बीएंडबी स्कीम के तहत सिल्वर कैटेगरी में केवल 6 कमरों के संचालन की अनुमति दी गई थी। लाइसेंस की वैधता 2027 तक थी, लेकिन जांच में पता चला कि यहां कथित तौर पर करीब 25 कमरे संचालित किए जा रहे थे। इतना ही नहीं, आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी मौजूद नहीं था।

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अब एक गलती और सीधे रद्द होगा लाइसेंस

पर्यटन मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी भी रजिस्टर्ड बीएंडबी यूनिट में स्वीकृत सीमा से अधिक कमरे संचालित होते पाए गए तो उसका लाइसेंस तत्काल रद्द कर दिया जाएगा। सरकार अब सभी लाइसेंसधारकों के रिकॉर्ड और संचालन की समीक्षा करने जा रही है।

आखिर क्या थी यह BnB स्कीम?

बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना की शुरुआत वर्ष 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सरकार के दौरान की गई थी। इसका उद्देश्य पर्यटकों और यात्रियों को होटल जैसी औपचारिक व्यवस्था के बजाय घर जैसा वातावरण उपलब्ध कराना था। इस योजना के तहत लोग अपने घरों को पंजीकृत कराकर मेहमानों को ठहराने की सुविधा दे सकते थे।

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योजना का मकसद था कि यात्रियों को कम खर्च में सुरक्षित आवास, घरेलू भोजन और भारतीय पारिवारिक माहौल का अनुभव मिल सके। समय के साथ यह मॉडल लोकप्रिय हुआ और वर्ष 2023 तक दिल्ली में 432 संपत्तियों में 2200 से अधिक कमरे इस योजना के तहत पंजीकृत हो चुके थे।

जांच के घेरे में पूरा सिस्टम

हादसे के बाद अब सवाल सिर्फ एक होटल पर नहीं, बल्कि पूरे निगरानी तंत्र पर उठ रहे हैं। आखिर स्वीकृत क्षमता से कई गुना अधिक कमरे कैसे संचालित होते रहे? क्या निरीक्षण प्रक्रिया में लापरवाही हुई या नियमों को नजरअंदाज किया गया?

इन सवालों के बीच दिल्ली सरकार का यह फैसला राजधानी के पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अब जांच पूरी होने के बाद कई और चौंकाने वाले खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

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