रांची की शराब फैक्ट्री में बड़ी छापेमारी, राजद नेता सुबोध राय गिरफ्तार, फर्जी लेबल लगाकर शराब बेचने का आरोप

Major raid at a liquor factory in Ranchi; RJD leader Subodh Rai arrested; accused of selling liquor with fake labels.

रांची। झारखंड की राजधानी रांची में नकली शराब का भांडाफोड़ हुआ है। पुलिस और उत्पाद विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ओरमांझी स्थित तरंगनी लिकर्स प्राइवेट लिमिटेड में छापेमारी की। फैक्ट्री से कथित तौर पर दूसरे राज्यों के नाम पर फर्जी लेबल लगाकर शराब बेचने का मामला सामने आने के बाद राजद नेता और बिहार विधान परिषद (एमएलसी) के पूर्व सदस्य सुबोध राय, उनके चालक देवेंद्र भगत और कर्मचारी रविकांत राय को गिरफ्तार कर लिया गया।

 

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तीनों को न्यायिक प्रक्रिया के बाद बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार भेज दिया गया। गौरतलब है कि इसी फैक्ट्री पर करीब दो वर्ष पहले भी उत्पाद विभाग ने छापेमारी कर इसे सील किया था। अब एक बार फिर सामने आए इस मामले ने अवैध शराब कारोबार और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

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देर रात चली छह घंटे की कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, सहायक उत्पाद आयुक्त उमाशंकर सिंह के नेतृत्व में देर रात करीब 12 बजे छापेमारी शुरू हुई, जो बुधवार सुबह करीब छह बजे तक चली। जांच के दौरान फैक्ट्री से भारी मात्रा में विभिन्न ब्रांड की शराब और संदिग्ध सामग्री बरामद की गई। दरअसल विभाग को शराब फैक्ट्री के बारे में गुप्त सूचना मिली थी, जिसके बाद ये कार्रवाई की गयी।

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तीन ब्रांड की अवैध शराब बनाने का आरोप

उत्पाद विभाग के अनुसार, फैक्ट्री में कथित तौर पर 8 पीएम, आफ्टर डार्क और अन्य ब्रांड की शराब तैयार की जा रही थी। आरोप है कि इन बोतलों पर दूसरे राज्यों के फर्जी लेबल लगाकर उन्हें बाजार में कम कीमत पर खपाया जा रहा था। जांच में बरामद कई बोतलों पर “For Sale in Uttar Pradesh” और “For Sale in Delhi” अंकित मिला। विभाग को आशंका है कि इनका अवैध परिवहन उत्तर प्रदेश, दिल्ली और अन्य राज्यों में किया जा रहा था।

 

छापेमारी में क्या-क्या हुआ बरामद?

कार्रवाई के दौरान टीम ने बड़ी मात्रा में शराब जब्त की, जिनमें शामिल हैं—

• 70 पेटी किंगफिशर स्ट्रॉन्ग प्रीमियम बीयर (प्रत्येक पेटी में 24 कैन)

• 218 पेटी आफ्टर डार्क ब्लू (प्रत्येक पेटी में 48 बोतल)

• 7 पेटी 8 पीएम (प्रत्येक पेटी में 48 बोतल)

• 78 पेटी रॉयल्सन गोल्ड व्हिस्की

बरामद शराब की कई बोतलों पर दूसरे राज्यों में बिक्री के लिए निर्धारित लेबल लगे मिले।

 

विभाग ने लगाए गंभीर आरोप

उत्पाद विभाग ने फैक्ट्री प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें—

• लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन कर विदेशी शराब का गलत स्टॉक रखना।

• फर्जी दस्तावेजों के जरिए शराब का परिवहन और तस्करी करना।

• स्वीकृत ब्रांड से मिलते-जुलते अन्य ब्रांड का अवैध भंडारण।

• दूसरे राज्यों में अवैध बिक्री की आशंका।

• राज्य सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाना।

 

 

 

अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

मामले के सामने आने के बाद उत्पाद विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। नियमों के अनुसार फैक्ट्री में उत्पादन की निगरानी के लिए विभाग की ओर से बॉन्ड अफसर की तैनाती की जाती है।आरोप है कि निगरानी व्यवस्था के बावजूद फैक्ट्री से फर्जी लेबल लगाकर शराब की आपूर्ति की जा रही थी। इस मामले में बॉन्ड अफसर की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।

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