सावधान: पतंग के धागे से 3 साल की बच्ची समेत बाइक सवार की कटी गर्दन….मौत

गुजरात । मकर संक्रांति के अवसर पर पतंग उड़ाने की परंपरा का प्रचलन है।गुजरात जैसे शहर में इस प्रचलन का महत्व काफी अधिक है। परंतु जब किसी पर्व त्यौहार की परंपरा किसी की जान के लिए घातक हो जाए तो यह अत्यंत दुखदाई हो जाती है। ऐसी ही खबर गुजरात के मेहसाणा और बड़ोदरा जिले से आ रही है, जहां पतंग के धागे की चपेट में आने से 3 साल की बच्ची और बाइक सवार 35 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गई।

पुलिस द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार की दोपहर मेहसाणा जिले के विसनगर कस्बे में अपनी मां के साथ घर जा रही कृष्णा ठाकुर की गर्दन में पतंग का मांझा वाली डोरी फंस गई और उसकी मौत हो गई। नजदीकी सरकारी अस्पताल में पहुंचने पर बच्ची को मृत घोषित कर दिया गया ।

लोगों के घायल होने के कई मामले आए सामने

पतंग के धागे से घायल होने की अलग-अलग जगहों से कई घटना सामने आई। बड़ोदरा शहर के छावनी इलाके में हुई एक अन्य घटना में पतन के धागे स्वामी जी यादव नाम के एक मोटरसाइकिल सवार की गर्दन कट जाने के बाद उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस थाने के एक अधिकारी ने कहा कि स्वामी जी यादव अपने दोपहिया वाहन पर एक पुल के नीचे आ रहे थे।तभी एक पतंग का मांझा उनके गले में फंस गया जिससे उनकी तुरंत मौत हो गई। आपातकालीन चिकित्सा सेवा तंत्र के अधिकारियों ने कहा कि पूरे गुजरात में दिनभर ने पतंग के मांझे से लोगों के घायल होने की कई मामले सामने आए हैं।

कैसे होती है घटना

मकर संक्रांति के अवसर पर सार्वजनिक स्थल या अपने अपने घरों के ऊपर से पतंगबाजी होती है। जिसमें एक दूसरे की पतंग को काटने की प्रतियोगिता भी खूब होती है। पतंग काटने के लिए अलग अलग तरीके के धागे का प्रयोग किया जाता है। जो धागे में धारदार चूर्ण लगाकर उसे तैयार किया जाता है और वह काफी धारदार बन जाती है। उड़ती हुई पतंग के धागे में काफी अधिक तान रहता है। जैसे ही किसी के गर्दन या शरीर के किसी हिस्से से रगड़ होने पर या धागे के आने जाने से उसकी गर्दन या शरीर के किसी हिस्से में रगड़ खाने से उस हिस्से को काट देता है जिस वजह से तत्काल मौके पर ही धागे की चपेट में आए हुए व्यक्ति की मौत हो जाती है।

HPBL मीडिया ऐसी घटना से बचने की सलाह देता है।

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