स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही की इंतहा! बिना जांचे ही HIV संक्रमित महिला का कर दिया आपरेशन, मचा अस्पताल में हड़कंप, उसी ओटी में चार और ऑपरेशन भी हुए थे…

The height of negligence in the Health Department! An HIV-positive woman underwent surgery without prior screening, sparking panic at the hospital; four other surgeries had also been performed in the same operating theatre...

पलामू: झारखंड का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर गंभीर सवालों में है। इस बार मामला मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एमआरएमसीएच) से जुड़ा है, जहां एक एचआईवी संक्रमित महिला का सिजेरियन ऑपरेशन किए जाने के बाद उसके संक्रमित होने की जानकारी सामने आने से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

मिली जानकारी के अनुसार इसी महीने 6 जून को एक गर्भवती महिला का सी-सेक्शन ऑपरेशन किया गया था। अस्पताल प्रशासन की तरफ से दावा किया गया है कि ऑपरेशन से पहले प्रसव कक्ष स्थित इन-हाउस लैब में रैपिड टेस्ट किट के माध्यम से एचआईवी जांच की गई थी और रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। इसी रिपोर्ट और उपलब्ध चिकित्सीय जानकारी के आधार पर ऑपरेशन किया गया। हालांकि ये दावे कितना पुख्ता है, ये फिलहाल  जांच का विषय है।

अस्पताल प्रशासनस  की तरफ से कहा गया है कि आपरेशन  के बाद जब महिला का डाक्यूमेंट चेक किया जा जा रहा है, तो दस्तावेजों और अन्य चिकित्सा रिकॉर्ड की जांच के दौरान पता चला कि संबंधित महिला पहले से एचआईवी पॉजिटिव थी। इस खुलासे के बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल एहतियाती कदम उठाए और मामले की समीक्षा शुरू कर दी।

हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि गर्भवती महिला और उसके पति को संक्रमण की जानकारी थी, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने चिकित्सकों को इसकी सूचना नहीं दी। साथ ही एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) से संबंधित कार्ड और रिकॉर्ड भी प्रस्तुत नहीं किए गए।

मामले ने इसलिए भी चिंता बढ़ा दी है क्योंकि प्रसूता की डिलीवरी के बाद उसी ऑपरेशन थिएटर में चार अन्य सर्जिकल प्रक्रियाएं भी की गईं। ऐसे में संक्रमण नियंत्रण, मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड के सत्यापन और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

घटना ऐसे समय में सामने आई है जब हाल ही में चाईबासा में संक्रमित रक्त चढ़ाने का मामला चर्चा में रहा था, जिस पर उच्च न्यायालय ने भी संज्ञान लिया था। अब पलामू की इस घटना ने एक बार फिर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

अस्पताल प्रशासन ने बताया कि नवजात शिशु को संक्रमण से बचाने के लिए आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं ऑपरेशन में शामिल डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मचारियों के लिए भी एआरटी सेंटर के माध्यम से पोस्ट एक्सपोजर प्रोटोकॉल लागू किया गया है।अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और मरीजों, नवजात शिशुओं तथा स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

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