धनबाद: करमाटांड स्वास्थ्य उपकेंद्र बनने से पहले ही विवादों में, ग्रामीणों के विरोध के बाद प्रशासनिक टीम पहुंची मौके पर, पुश्तैनी जमीन बताकर….
Dhanbad: Karmatand Health Sub-centre mired in controversy even before construction; an administrative team visited the site following protests by villagers, who claimed the land was ancestral property...

धनबाद। गोविंदपुर प्रखंड अंतर्गत करमाटांड़ में प्रस्तावित स्वास्थ्य उपकेंद्र के निर्माण को लेकर विवाद बढ़ गया है। निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही स्थानीय ग्रामीणों और जमीन पर दावा करने वाले रैयतों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। शनिवार को विवाद गहराने के बाद प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। इधर ग्रामीणों का आरोप है कि जिस भूमि पर स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाया जा रहा है, वह उनकी पुश्तैनी जमीन है और बिना सहमति के निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा है।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में संवेदक द्वारा स्वयं नारियल फोड़कर शिलान्यास कर दिया गया। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई और उन्होंने निर्माण कार्य पर आपत्ति जताई।
विरोध की सूचना पर पहुंचे सीओ
जानकारी मिलने के बाद गोविंदपुर अंचल अधिकारी (सीओ) धर्मेंद्र दुबे प्रशासनिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे और पूरे मामले का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों और जमीन पर दावा करने वाले लोगों से बातचीत कर उनकी आपत्तियां सुनीं।सीओ धर्मेंद्र दुबे ने बताया कि राजस्व अभिलेखों के अनुसार संबंधित भूमि बिहार-झारखंड सरकार के नाम दर्ज है और सरकारी कार्यों के लिए अधिकृत है। उन्होंने कहा कि प्रशासन उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रहा है।
रैयतों ने जताया मालिकाना हक
वहीं जमीन पर दावा करने वाले परिवारों का कहना है कि यह भूमि उनके पूर्वजों की पुश्तैनी रैयती जमीन है। दावेदारों के अनुसार यह जमीन स्वर्गीय बिरोधा घाटवारिन, पत्नी स्वर्गीय मेघु राय, के नाम पर दर्ज रही है और उनका परिवार लगभग 100 वर्षों से इस भूमि पर काबिज है।जमीन के दावेदार अजय कुमार राय ने कहा कि विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य तब तक नहीं किया जाना चाहिए, जब तक मामले का अंतिम फैसला न्यायालय या सक्षम प्राधिकारी द्वारा नहीं हो जाता।
निर्माण कार्य रोकने की मांग
ग्रामीणों और रैयतों ने प्रशासन से निर्माण कार्य तत्काल रोकने की मांग की है। उनका आरोप है कि सभी पक्षों की सहमति और कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना स्वास्थ्य उपकेंद्र निर्माण की पहल की जा रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
स्वास्थ्य सुविधा और भूमि विवाद आमने-सामने
एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य उपकेंद्र का निर्माण कराना चाहती है, वहीं दूसरी ओर भूमि स्वामित्व को लेकर उठे विवाद ने परियोजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं।फिलहाल प्रशासन सरकारी अभिलेखों के आधार पर मामले की जांच कर रहा है, जबकि जमीन पर दावा करने वाले परिवार अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने की बात कह रहे हैं। ऐसे में अब सबकी नजर प्रशासन और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है।









