Teacher Vacancy : 1.70 लाख शिक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट ने नीतीश सरकार से मांगा जवाब, नयी नियमावली को दी गयी है चुनौती

पटना। बिहार टीचर पर सड़कों पर छिड़ा संग्राम अब कोर्ट के कटघरे तक पहुंच गया है। शिक्षक भर्ती को लेकर सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक का अभ्यर्थियों ने दरवाजा खटखटाया है। सोमवार को पटना हाईकोर्ट ने राज्य में शिक्षकों की बहाली को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई। राज्य सरकार की नयी नियमावली पर कोर्ट ने राज्य सरकार ने जवाब तलब किया है।
अगली सुनवाई 29 अगस्त को होगी। बता दें कि बिहार सरकार ने शिक्षकों की भर्ती के लिए नई नियमावली लागू कर दी है, जिसका बड़े पैमाने पर शिक्षक विरोध कर रहे हैं। कोर्ट में महाधिवक्ता पीके शाही एवं अधिवक्ता अमीष कुमार ने पक्ष रखा।कोर्ट में सुबोध कुमार की याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में कहा गया है कि नई नियमावली के अंतर्गत शिक्षकों की बहाली के लिए परीक्षा लेकर अनुशंसा करने की जिम्मेदारी बिहार लोक सेवा आयोग को सौंपी गई है।
नियमावली 2006 के अंतर्गत नियुक्त शिक्षकों की योग्यता और कार्य समान है, लेकिन नियमावली 2023 के अंतर्गत बहाल शिक्षकों का वेतन अलग होगा। यह समानता के सिद्धांत का उल्लंघन है। मुख्य न्यायाधीश के. विनोद चंद्रन एवं न्यायाधीश पार्थ सारथी की खंडपीठ ने सुबोध कुमार की याचिका पर सुनवाई की।
याचिका में कहा गया है कि राज्य में बड़े पैमाने शिक्षकों की बहाली के लिए 2023 में नई नियमावली बनाई गई है। जिसके तहत 2006 से 2023 तक बहाल शिक्षकों को भी सरकारी कर्मचारी बनने के लिए इस प्रक्रिया में शामिल होना होगा। यह भी कि परीक्षा में सफल शिक्षक ही सरकारी कर्मी बन पाएंगे। परीक्षा में शामिल न होने वाले नियोजित शिक्षकों पर पुरानी नियमावली ही लागू होगी। राज्य सरकार से इस संदर्भ में कोर्ट ने जवाब मांगा है।











