भारत ने अंतरिक्ष में रचा इतिहास! पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ‘Vikram-1’ की सफल लॉन्चिंग, PM मोदी का संदेश भी पहुंचा अंतरिक्ष

स्काईरूट एयरोस्पेस के Vikram-1 ने श्रीहरिकोटा से भरी सफल उड़ान। भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि, वैज्ञानिकों और टीम को पीएम मोदी ने दी बधाई।

 

श्रीहरिकोटा।

भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अपने पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट Vikram-1 का सफल प्रक्षेपण कर दिया। हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित इस रॉकेट ने श्रीहरिकोटा से सफल उड़ान भरी, जिससे भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने एक नया अध्याय लिख दिया।

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इस ऐतिहासिक मिशन की खास बात यह रही कि रॉकेट के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ से लिखा संदेश भी अंतरिक्ष भेजा गया। इसके अलावा स्काईरूट की टीम, निवेशकों, नीति-निर्माताओं और दुनियाभर के शुभचिंतकों के हस्तलिखित संदेश भी मिशन का हिस्सा बने।

पीएम मोदी ने दी बधाई

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लॉन्च का लाइव प्रसारण देखा। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम से फोन पर बात कर उन्हें इस ऐतिहासिक सफलता के लिए बधाई दी।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा का नया पड़ाव है और अभी यह सिर्फ शुरुआत है। उन्होंने युवाओं के नवाचार और वैज्ञानिक सोच की भी सराहना की।

क्या है Vikram-1 की खासियत?

हैदराबाद की कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित Vikram-1 चार चरणों (Four-Stage) वाला लॉन्च व्हीकल है। इसमें तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल लगाया गया है। इसे तेज और ऑन-डिमांड सैटेलाइट लॉन्च सेवाओं के लिए डिजाइन किया गया है।

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Vikram-1 की प्रमुख विशेषताएं

  • भारत का पहला कमर्शियल ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल
  • नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया।
  • लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में सैटेलाइट भेजने के लिए विकसित।
  • 350 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने में सक्षम।
  • 260 किलोग्राम तक के उपग्रह को सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट (SSO) में स्थापित कर सकता है।
  • पृथ्वी से करीब 500 किलोमीटर की ऊंचाई तक सैटेलाइट पहुंचाने की क्षमता।

भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए Vikram-1 की यह सफलता एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जिससे भविष्य में कमर्शियल स्पेस लॉन्च मार्केट में भारत की भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है।

 

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