क्या फिर बदलने वाले हैं नोट? RBI की बड़ी तैयारी, 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोटों को लेकर जारी हुआ ग्लोबल टेंडर

घबराइए नहीं... नोटबंदी नहीं हो रही। RBI पायलट प्रोजेक्ट के तहत पॉलीमर नोट लाने की तैयारी में, जानिए पुराने नोटों का क्या होगा।

 

नई दिल्ली।

देश में एक बार फिर नोटों को लेकर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 10 और 20 रुपये के पॉलीमर (प्लास्टिक) नोट तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। आरबीआई की नोट छापने वाली इकाई भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने प्लास्टिक नोटों के निर्माण के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया है।

हालांकि, इसका नोटबंदी से कोई संबंध नहीं है। मौजूदा कागजी नोट पूरी तरह वैध रहेंगे और उनके चलन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

10 और 20 रुपये के नोटों से होगी शुरुआत

आरबीआई की ओर से जारी टेंडर के तहत दुनियाभर की कंपनियों से पॉलीमर शीट की आपूर्ति के लिए Expression of Interest (EOI) मांगा गया है। इच्छुक कंपनियां 18 अगस्त तक अपनी बोली जमा कर सकती हैं।

शुरुआती चरण में 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोट पायलट प्रोजेक्ट के रूप में जारी किए जा सकते हैं। यदि यह सफल रहा, तो भविष्य में अन्य मूल्यवर्ग के नोट भी पॉलीमर सामग्री में लाए जा सकते हैं।

क्या बंद हो जाएंगे पुराने कागजी नोट?

इस खबर के बाद लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मौजूदा कागजी नोट बंद हो जाएंगे?

जवाब है—नहीं।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, RBI ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा कागजी नोट लीगल टेंडर (वैध मुद्रा) बने रहेंगे और पहले की तरह चलन में रहेंगे। पॉलीमर नोट केवल एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में धीरे-धीरे सिस्टम में शामिल किए जाएंगे।

प्लास्टिक नोटों के फायदे

पॉलीमर नोट पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में कई मामलों में अधिक टिकाऊ माने जाते हैं।

  • कागजी नोटों की तुलना में ढाई से चार गुना अधिक लंबे समय तक चलते हैं।
  • पानी से आसानी से खराब नहीं होते।
  • जल्दी फटते नहीं और कम गंदे होते हैं।
  • इनकी सतह पर बैक्टीरिया कम टिकते हैं।
  • पारदर्शी विंडो और आधुनिक सुरक्षा फीचर्स के कारण इनकी नकली कॉपी बनाना बेहद कठिन होता है।

क्या होते हैं पॉलीमर नोट?

पॉलीमर नोट सामान्य प्लास्टिक से नहीं, बल्कि एक विशेष प्रकार की मजबूत पॉलीमर फिल्म पर बनाए जाते हैं। इस पर विशेष कोटिंग की जाती है, जिससे नोट की छपाई संभव होती है। इनकी सबसे बड़ी पहचान ट्रांसपेरेंट सिक्योरिटी विंडो होती है, जो सुरक्षा को और मजबूत बनाती है।

दुनिया के कई देशों में पहले से चल रहे हैं

पॉलीमर नोटों की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 1988 में की थी। इसके बाद कनाडा, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, वियतनाम, मलेशिया और ब्रुनेई सहित 40 से अधिक देशों ने इन्हें अपनाया। इन देशों के अनुभव बताते हैं कि शुरुआती लागत अधिक होने के बावजूद पॉलीमर नोट लंबे समय में अधिक टिकाऊ और किफायती साबित होते हैं।

2027 से हो सकता है बड़ा रोलआउट

जानकारों के मुताबिक, यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो 2027 से देशभर में पॉलीमर नोटों का बड़े स्तर पर प्रचलन शुरू किया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में RBI की ओर से अंतिम घोषणा अभी आना बाकी है।

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