झारखंड : बुढ़ा पहाड़ में पानी संकट का मुद्दा विधानसभा में गूंजा, सरकार से जवाब तलब
The issue of water crisis in Budha Pahad resonated in the Assembly, demanding a reply from the government.

झारखंड विधानसभा में दुर्गम बुढ़ा पहाड़ इलाके में पेयजल संकट का मुद्दा जोर-शोर से उठा। Budha Pahar Water Crisis को लेकर विधायक आलोक चौरसिया ने सरकार से सवाल किया कि बदगड़ प्रखंड के कई गांवों में आज भी लोगों को पीने के पानी की भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
विधायक आलोक चौरसिया ने सदन में कहा कि टोंगरी गांव में जल मीनार का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद पिछले एक साल से इसे चालू नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस गांव में पहुंचे थे और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है और जल मीनार सिर्फ शोपीस बनकर खड़ी है। Budha Pahar Water Crisis को लेकर उन्होंने सरकार से जल्द समाधान की मांग की।
इस पर विभागीय मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने जवाब देते हुए कहा कि राज्य के कई क्षेत्रों में नल-जल योजना का काम धीमी गति से चल रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि टोंगरी गांव में जल मीनार बन चुकी है, लेकिन कुछ तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतों के कारण पेयजल आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। मंत्री ने बताया कि जिस कंपनी ने निर्माण कार्य किया था, उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है और आगे की कार्रवाई भी जारी है।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तीन साल पहले गांव गए थे और विकास के लिए कई घोषणाएं की थीं, हालांकि गांव को आधिकारिक रूप से गोद नहीं लिया गया था। फिर भी सरकार सभी नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और जल्द ही Budha Pahar Water Crisis से जुड़े इस मुद्दे का समाधान करने की कोशिश की जाएगी।
वहीं वरिष्ठ विधायक सीपी सिंह ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि रांची जैसे शहर में पानी की किल्लत है, तो ग्रामीण इलाकों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने सरकार से गर्मी शुरू होने से पहले पानी की समस्या दूर करने की मांग की। विधायक आलोक चौरसिया ने भी सरकार से जल्द ठोस कदम उठाने की अपील की।












