झारखंड: रहस्यमयी बीमारी का कहर, एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत, अंधविश्वास ने पूरा परिवार कर दिया तबाह

Jharkhand: Mysterious illness wreaks havoc, five members of the same family die; superstition destroys the entire family.

रांची/पलामू। एक ही परिवार के पांच लोगों की रहस्यमयी मौत ने सभी को उलझा दिया है। मामला झारखंड के पलामू जिले के पड़वा प्रखंड स्थित सिक्का गांव का है। इस गांव में एक रहस्यमयी बीमारी ने पूरे परिवार को तबाह कर दिया है। इलाज के दौरान रविवार देर रात रांची के रिम्स अस्पताल में 20 वर्षीय नकुल महतो की मौत हो गई। इसके साथ ही एक ही परिवार में मृतकों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है।

 

जानकारी के मुताबिक अब परिवार की केवल एक सदस्य लाखो उर्फ लाखी देवी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं।लगातार हो रही मौतों से पूरे गांव में दहशत का माहौल है। स्वास्थ्य विभाग अब तक बीमारी की असली वजह का पता नहीं लगा पाया है, जबकि ग्रामीणों में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

 

एक-एक कर उजड़ता चला गया पूरा परिवार

दरअसल इस दर्दनाक सिलसिले की शुरुआत 19 जून की रात परिवार के मुखिया कुलदीप महतो की मौत से हुई। अगले ही दिन उनकी बेटी बबीता कुमारी ने भी दम तोड़ दिया। इसके बाद इलाज के दौरान 16 वर्षीय इंदु कुमारी, 28 वर्षीय पुत्रवधू श्वेता देवी और अब बेटे नकुल महतो की भी मौत हो चुकी है। परिवार की अंतिम सदस्य लाखो देवी का इलाज रांची के रिम्स में जारी है।

 

अंधविश्वास बना सबसे बड़ा दुश्मन

जांच में एक बेहद चिंताजनक पहलू सामने आया है। परिवार आधुनिक चिकित्सा की बजाय झाड़-फूंक और ओझा-गुनी पर अधिक भरोसा करता था। बताया जा रहा है कि करीब छह महीने पहले परिवार के एक सदस्य के बीमार पड़ने पर वे एक ओझा के पास गए थे। वहां से मिली भभूत को सरसों के तेल में मिलाकर दवा की तरह इस्तेमाल किया जाता था।

 

परिजनों की मौत के बाद भी परिवार के अन्य सदस्य अस्पताल से भागकर झाड़-फूंक कराते रहे। स्वास्थ्य विभाग ने कई बार उन्हें इलाज के लिए भर्ती कराया, लेकिन वे बार-बार अस्पताल छोड़कर चले जाते थे। डॉक्टरों का मानना है कि समय पर इलाज नहीं मिलने से उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई।

 

स्वास्थ्य विभाग के सामने बीमारी बनी पहेली

रहस्यमयी बीमारी का कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। कुलदीप महतो और उनकी बेटी के पोस्टमार्टम को एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर मौत की वजह का खुलासा कब होगा।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मेदिनीनगर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में फोरेंसिक जांच की सुविधा नहीं होने के कारण बीमारी की सटीक वजह पता लगाने में परेशानी आ रही है। अधिकारियों के मुताबिक विस्तृत फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

 

स्वास्थ्य विभाग ने किया था रेस्क्यू

दो लोगों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची थी, लेकिन बाकी बीमार सदस्य वहां नहीं मिले। बाद में उन्हें लेस्लीगंज क्षेत्र से खोजकर मेदिनीनगर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। हालांकि वे वहां से भी भाग गए थे। काफी प्रयास के बाद दोबारा उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। गंभीर हालत में उन्हें रांची रिम्स रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान एक-एक कर तीन और लोगों की मौत हो गई।

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