JPSC-JSSC परीक्षा विवाद ने पकड़ा तूल, विधानसभा की ओर उमड़ा छात्रों का हुजूम… नेहा बोरा भी आंदोलन में उतरीं

Ranchi News: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन अब विधानसभा तक पहुंच गया है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी और युवा बैनर, पोस्टर और झंडे लेकर विधानसभा मार्च पर निकल पड़े हैं। आंदोलन में विभिन्न छात्र और युवा संगठनों के कार्यकर्ता भी शामिल हुए हैं।
हाथों में पोस्टर, जुबान पर नारे… विधानसभा की ओर बढ़े छात्र
विधानसभा मार्च में शामिल प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। छात्रों के हाथों में मौजूद पोस्टर और बैनरों पर “भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली पर रोक लगाओ” जैसे नारे लिखे हुए हैं।
छात्रों का कहना है कि सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के साथ किसी तरह का अन्याय न हो।
कई छात्र संगठनों ने मिलाया हाथ
छात्रों की मांगों के समर्थन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF), रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (RYA) और ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन (AIYF) समेत कई छात्र और युवा संगठनों के कार्यकर्ता मार्च में शामिल हुए हैं।
इन संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
नेहा बोरा भी मार्च में शामिल
इस विधानसभा मार्च को उस वक्त और मजबूती मिली, जब AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी छात्रों के समर्थन में रांची पहुंचीं। दिल्ली में छात्र आंदोलन का नेतृत्व करने के बाद अब वह झारखंड के अभ्यर्थियों के समर्थन में विधानसभा मार्च में शामिल हुई हैं।
उनके शामिल होने से आंदोलन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।
क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। छात्रों और युवा संगठनों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है।
छात्र संगठनों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अब देखना होगा कि विधानसभा मार्च के बाद सरकार की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाया जाता है।
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