National Handloom Day: आखिर क्यों 7 अगस्त को याद किया जाता है ये खास दिन? PM मोदी ने हथकरघा क्षेत्र को बताया आत्मनिर्भर भारत की ताकत

नई दिल्ली: भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा और देश के बुनकरों-कारीगरों के सम्मान में आज राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (National Handloom Day) मनाया जा रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए हथकरघा क्षेत्र को ग्रामीण सशक्तिकरण, महिला-नेतृत्व वाले विकास और आत्मनिर्भर भारत का महत्वपूर्ण आधार बताया।
प्रधानमंत्री ने देश के बुनकरों और कारीगरों के कौशल, रचनात्मकता और समर्पण को नमन किया। उन्होंने कहा कि इन कारीगरों ने पीढ़ियों से भारत की समृद्ध परंपराओं और विरासत को सहेजने के साथ-साथ उसे आगे बढ़ाने का काम किया है।
आत्मनिर्भर भारत की मजबूत कड़ी है हथकरघा सेक्टर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि सरकार हथकरघा क्षेत्र को लगातार समर्थन देती रहेगी। उन्होंने इसे ग्रामीण सशक्तिकरण, महिला-नेतृत्व वाले विकास और आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने का महत्वपूर्ण आधार बताया।
हथकरघा क्षेत्र देश के लाखों बुनकरों और कारीगरों की आजीविका से जुड़ा है। ऐसे में इस क्षेत्र को बढ़ावा देने से न केवल भारतीय कला और संस्कृति को मजबूती मिलती है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं।
PM मोदी ने की खास अपील
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री ने लोगों से अपने पसंदीदा हथकरघा उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने लोगों से ‘नेशनल हैंडलूम डे’ हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए हथकरघा उत्पादों और GRWM (Great Ready With Me) वीडियो साझा करने को कहा।
प्रधानमंत्री का कहना है कि इस तरह की पहल से हथकरघा क्षेत्र से जुड़े बुनकरों और कारीगरों का उत्साह बढ़ेगा और भारतीय हथकरघा उत्पादों को व्यापक पहचान मिलेगी।
आखिर 7 अगस्त को ही क्यों मनाया जाता है Handloom Day?
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस हर साल 7 अगस्त को मनाया जाता है। इस तारीख का संबंध वर्ष 1905 के स्वदेशी आंदोलन से है। इस आंदोलन ने भारतीय वस्तुओं के इस्तेमाल और स्वदेशी भावना को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का उद्देश्य देश की पारंपरिक बुनाई कला, हथकरघा उत्पादों और उनसे जुड़े बुनकरों एवं कारीगरों को सम्मान देना है। यह दिन लोगों को स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने के लिए भी प्रेरित करता है।
हथकरघा खरीदना यानी बुनकरों को सीधा समर्थन
प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले भी लोगों से हथकरघा उत्पाद खरीदने और उनसे जुड़े वीडियो साझा करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि हथकरघा दिवस मनाने का एक अर्थ बुनकरों और छोटे व्यापारियों की मदद करना भी है।
भारत की अलग-अलग परंपराओं, रंगों और डिजाइनों से जुड़े हथकरघा उत्पाद देश की सांस्कृतिक विविधता की पहचान हैं। ऐसे में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस न सिर्फ इस विरासत का उत्सव है, बल्कि इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का भी अवसर है।









