झारखंड: माता मंदिर से लौटने के दौरान बड़ा हादसा, पति-पत्नी की हुई मौत, हेलमेट के बावजूद नहीं बची जान
Jharkhand: Couple dies in major accident while returning from a temple; lives lost despite wearing helmets.

गुमला: माता मंदिर से पूजा कर लौट रहे पति पत्नी की सड़क हादसे में मौत हो गयी। हादसे के बाद इलाके में मातम का माहौल है। घटना झारखंड के गुमला जिले की है, जहां में मंगलवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में स्कूटी सवार दंपती की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा सदर प्रखंड क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल अंजन धाम के पास हुआ।
बताया जा रहा है कि दंपती मंदिर में पूजा-अर्चना कर वापस लौट रहे थे, तभी अचानक सड़क पर एक मवेशी आ गया। उसे बचाने की कोशिश में स्कूटी अनियंत्रित होकर गहरी ढलान से नीचे उतर गई और पत्थर व पेड़ से जा टकराई। हादसा इतना भीषण था कि दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
पूजा कर लौटते समय हुआ हादसा
पुलिस के अनुसार दंपती मंगलवार को अंजन पहाड़ी स्थित मंदिर में दर्शन-पूजन करने पहुंचे थे। वापसी के दौरान पहाड़ी रास्ते में अचानक एक मवेशी सामने आ गया। स्कूटी चालक ने वाहन को बचाने का प्रयास किया, लेकिन तेज ढलान होने के कारण संतुलन बिगड़ गया। स्कूटी सड़क छोड़कर नीचे चली गई और पत्थरों व पेड़ से टकरा गई।
मौके पर पहुंची पुलिस
घटना की सूचना मिलते ही टोटो थाना प्रभारी कुंदन कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए गुमला सदर अस्पताल भेजा, जहां चिकित्सक डॉ. असीम मिंज ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
लोहरदगा के रहने वाले थे मृतक
पुलिस जांच में मृतकों की पहचान लोहरदगा जिले के सेन्हा थाना क्षेत्र के कुंद गढ़ी निवासी दंपती के रूप में हुई है। दोनों स्कूटी से अंजन धाम दर्शन के लिए आए थे। हादसे के बाद पुलिस ने मृतकों के मोबाइल फोन के जरिए उनके परिजनों से संपर्क कर घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही परिवार के लोग गुमला सदर अस्पताल पहुंच गए।
हेलमेट पहनने के बावजूद नहीं बची जान
पुलिस के मुताबिक, स्कूटी चालक ने हेलमेट पहन रखा था, लेकिन हादसा इतना गंभीर था कि सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आने के कारण उसकी भी मौत हो गई। दुर्घटना की तीव्रता इतनी अधिक थी कि हेलमेट भी जान नहीं बचा सका।स्थानीय लोगों का कहना है कि अंजन धाम, जिसे भगवान हनुमान की जन्मस्थली माना जाता है, वहां मंगलवार को विशेष पूजा और भंडारे के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर तक जाने वाला मार्ग काफी ढलानदार है और कई स्थानों पर सड़क किनारे सुरक्षा रेलिंग नहीं लगी है। ऐसे में वाहन अनियंत्रित होने पर सीधे चट्टानों या पेड़ों से टकराने का खतरा बना रहता है।









