Sugar Free का सच आया सामने! 10 साल तक आर्टिफिशियल स्वीटनर लेने वालों में डायबिटीज का खतरा 31% तक ज्यादा, जानिए क्या कहती है स्टडी

नई दिल्ली: वजन बढ़ने और डायबिटीज से बचने के लिए आजकल बड़ी संख्या में लोग चीनी की जगह शुगर फ्री या आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल करते हैं। लोगों को लगता है कि इनमें कैलोरी कम होती है, इसलिए ये सामान्य चीनी से बेहतर विकल्प हैं। लेकिन एक रिसर्च ने इस धारणा पर सवाल खड़े किए हैं।

फ्रंटियर्स ऑफ न्यूट्रिशन जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, लंबे समय तक आर्टिफिशियल स्वीटनर का सेवन करने वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा करीब 31% तक ज्यादा पाया गया। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह एक ऑब्जर्वेशनल स्टडी थी, इसलिए इससे यह साबित नहीं होता कि आर्टिफिशियल स्वीटनर सीधे डायबिटीज का कारण बनते हैं।

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36 हजार से ज्यादा लोगों पर हुई रिसर्च

रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में की गई इस स्टडी में 36,000 से ज्यादा लोगों को करीब 14 साल तक ट्रैक किया गया। रिसर्च में रोजाना आर्टिफिशियल स्वीटनर वाले सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन करने वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम ज्यादा देखा गया।

स्टडी में रोजाना एक कैन आर्टिफिशियल स्वीटनर वाला सॉफ्ट ड्रिंक पीने वालों में डायबिटीज का खतरा करीब 38% ज्यादा पाया गया, जबकि सामान्य शुगर वाले सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन करने वालों में यह जोखिम करीब 28% ज्यादा था।

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सिर्फ शुगर छोड़ना ही काफी नहीं?

कई लोग ब्लड शुगर और वजन को नियंत्रित रखने के लिए चीनी को अपनी डाइट से पूरी तरह हटा देते हैं और उसकी जगह आर्टिफिशियल स्वीटनर वाले उत्पादों का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। लेकिन रिसर्च से संकेत मिलता है कि किसी खाद्य पदार्थ को सिर्फ ‘शुगर फ्री’ या ‘लो कैलोरी’ देखकर उसे पूरी तरह हेल्दी मान लेना सही नहीं है।

लंबे समय तक ऐसे उत्पादों के सेवन का मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इसके पीछे की वजहों को समझने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है।

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पेट के बैक्टीरिया पर भी पड़ सकता है असर

आर्टिफिशियल स्वीटनर को लेकर एक चिंता गट माइक्रोबायोम, यानी आंतों में मौजूद बैक्टीरिया के संतुलन से जुड़ी है। कुछ शोधों में संकेत मिले हैं कि ऐसे स्वीटनर आंतों के माइक्रोबायोम को प्रभावित कर सकते हैं, जिसका असर शरीर के मेटाबॉलिज्म और इंसुलिन संवेदनशीलता पर पड़ सकता है।

आंतों के बैक्टीरिया के संतुलन में बदलाव शरीर में सूजन और मेटाबॉलिक समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, इन प्रभावों को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण अभी पूरी तरह निर्णायक नहीं हैं।

दिमाग को मिलता है मीठे का संकेत, लेकिन कैलोरी नहीं

आर्टिफिशियल स्वीटनर का स्वाद चीनी जैसा मीठा होता है, लेकिन इनमें सामान्य चीनी की तुलना में कैलोरी काफी कम या नगण्य हो सकती है। इस वजह से शरीर में मीठे के स्वाद और वास्तविक ऊर्जा के बीच अंतर पैदा होने को लेकर भी वैज्ञानिकों ने सवाल उठाए हैं।

कुछ शोधों के मुताबिक, इससे भूख, खाने की इच्छा और मेटाबॉलिक प्रतिक्रियाओं पर असर पड़ सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति पर इसका प्रभाव एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है।

तो क्या शुगर फ्री चीजें पूरी तरह छोड़ दें?

इस स्टडी के आधार पर आर्टिफिशियल स्वीटनर को पूरी तरह नुकसानदायक या डायबिटीज का सीधा कारण बताना सही नहीं होगा। रिसर्च सिर्फ एक संबंध (association) दिखाती है, कारण और प्रभाव साबित नहीं करती।

अगर आप वजन या ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए नियमित रूप से आर्टिफिशियल स्वीटनर या डाइट ड्रिंक लेते हैं, तो अपनी डाइट का मूल्यांकन किसी डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन से कराना बेहतर है। खासकर डायबिटीज या अन्य मेटाबॉलिक समस्या वाले लोगों को अपनी डाइट में बड़े बदलाव विशेषज्ञ की सलाह से ही करने चाहिए।

निष्कर्ष: ‘शुगर फ्री’ लिखा होना किसी उत्पाद को अपने आप हेल्दी नहीं बना देता। संतुलित डाइट, नियमित शारीरिक गतिविधि और कुल कैलोरी सेवन पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

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