अब सरकार की नजर आपके डेटा पर भी! छत्तीसगढ़ में लागू होंगे सख्त डिजिटल सुरक्षा नियम, अफसरों को मिला अलर्ट

 

रायपुर। डिजिटल दुनिया में बढ़ते साइबर खतरों और डेटा चोरी की घटनाओं के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने नागरिकों के निजी डेटा की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। राजधानी रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय डिजिटल इंडिया परामर्श कार्यशाला में सरकार ने साफ कर दिया कि अब विभागों को “Privacy by Design” यानी सिस्टम की शुरुआत से ही गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। इसके साथ ही “डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम-2023” के सख्त पालन के निर्देश भी जारी किए गए।

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छत्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशन सोसायटी (CHiPS) और भारत सरकार के नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में राज्य शासन के 180 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में डेटा सुरक्षा, साइबर खतरे, डिजिटल गवर्नेंस और राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जुड़ी व्यवस्थाओं पर गहन चर्चा हुई।

CHiPS के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मयंक अग्रवाल ने कहा कि नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा अब सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि DPDP अधिनियम केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था में बड़ा बदलाव है, जिसमें “Citizen-Centric Data Governance” को लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का “सेवा सेतु” प्लेटफॉर्म पहले ही डिजिलॉकर, उमंग और माय स्कीम जैसे राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स से जोड़ा जा चुका है, जिससे लोगों को डिजिटल सेवाएं आसानी से मिल रही हैं।

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कार्यशाला में नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन के संचालक सुनील जैन ने विभागों को चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अब डेटा प्रबंधन में लापरवाही भारी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि DPDP अधिनियम सरकारी संस्थाओं के लिए नई और सख्त जवाबदेहियां तय करता है और इसका कड़ाई से पालन जरूरी होगा। इससे सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और साइबर सुरक्षा भी मजबूत होगी।

राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) रायपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक पी. रामाराव ने अधिकारियों को साइबर अपराधियों के बढ़ते नेटवर्क को लेकर आगाह किया। उन्होंने बताया कि मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और अन्य निजी जानकारियां आज साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा निशाना हैं। इससे बचने के लिए विभागों को “डेटा न्यूनतमकरण”, नियमित सुरक्षा ऑडिट और लॉग मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाएं अपनानी होंगी।

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कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने तकनीकी प्रस्तुतियों के जरिए डेटा फिड्यूशियरी, सहमति प्रबंधन, शिकायत निवारण तंत्र, डिजिलॉकर इंटीग्रेशन और सुरक्षित डिजिटल प्रमाण-पत्रों पर विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों को यह भी बताया गया कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए अंतिम व्यक्ति तक सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जा सकती है।

कार्यशाला के समापन पर CHiPS के संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुपम आशीष टोप्पो ने घोषणा की कि अब सभी विभागों के लिए 30, 60 और 90 दिनों की चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इस एक्शन प्लान के जरिए राज्य में डेटा सुरक्षा कानून का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाएगा और डिजिटल सेवाओं को और अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा।

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