क्या छत्तीसगढ़ रचेगा नया हरित इतिहास? CM साय ने किया ऐसा आगाज, जो बदल सकता है प्रदेश की तस्वीर

'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान 2026-27 की शुरुआत, पिछले साल के रिकॉर्ड के बाद इस बार और बड़े लक्ष्य की तैयारी

रायपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ से एक ऐसा संदेश दिया गया, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश की पर्यावरणीय तस्वीर बदल सकता है। राजधानी रायपुर स्थित राजीव स्मृति वन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान 2026-27 का शुभारंभ करते हुए बरगद का पौधा रोपा और प्रदेशवासियों से प्रकृति संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति और मानव जीवन का रिश्ता अटूट है, लेकिन अनियंत्रित वृक्ष कटाई और बढ़ता पर्यावरणीय असंतुलन पूरी दुनिया के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान केवल पौधारोपण नहीं, बल्कि भावनाओं और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने वाली एक प्रेरक पहल है।

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मुख्यमंत्री साय ने बताया कि पिछले वर्ष प्रदेश में ढाई करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन जनसहभागिता और प्रशासनिक प्रयासों के चलते साढ़े तीन करोड़ से अधिक पौधारोपण हुआ। उन्होंने भरोसा जताया कि इस वर्ष भी छत्तीसगढ़ निर्धारित लक्ष्य से कहीं आगे बढ़कर नया कीर्तिमान स्थापित करेगा।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है जहां लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है। सरकार और वन विभाग के लगातार प्रयासों से जंगलों का संरक्षण और विस्तार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपने घर, खेत, आंगन और मेड़ों में अपनी मां के नाम एक पौधा लगाने की अपील करते हुए कहा कि पर्यावरण बचाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का नैतिक दायित्व है।

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मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज की प्रकृति संरक्षण परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समुदाय सदियों से जंगलों को अपनी संस्कृति और जीवन का हिस्सा मानकर उनकी रक्षा करता आया है। सरना स्थलों में वृक्षों की पूजा प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना का जीवंत उदाहरण है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने समाज सेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पद्मश्री सम्मानित पंडी राम मंडावी, जागेश्वर यादव और डॉ. रामचंद्र गोडबोले का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि इन विभूतियों का जीवन समाज के लिए समर्पण और सेवा की प्रेरणादायी मिसाल है।

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कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा प्रकाशित कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का भी विमोचन किया गया। वहीं वन मंत्री केदार कश्यप ने अभियान को प्रकृति और मातृत्व के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अनूठा माध्यम बताते हुए प्रदेशवासियों से इसे जन-जन का आंदोलन बनाने की अपील की।

कार्यक्रम में बिलासपुर जिले के कोपरा जलाशय को रामसर साइट का दर्जा मिलने पर भी खुशी जाहिर की गई। साथ ही भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम सिलीबहार की चंदनबती कोला ने स्व-सहायता समूहों द्वारा जंगल संरक्षण और जैविक खेती के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी साझा कर सभी का ध्यान आकर्षित किया।

राजीव स्मृति वन में आयोजित इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति ने यह संकेत भी दिया कि पर्यावरण संरक्षण अब केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी का बड़ा अभियान बनता जा रहा है।

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