अमेरिका टॉप-3 में, चीन का आधा कब्जा… और भारत? कहीं भी नहीं….क्यों पीछे रह गया भारत? पढ़ें पूरी रिपोर्ट…

ग्लोबल EV बाज़ार में भूचाल—भारत आउट, चीन सुपरपावर!

इलेक्ट्रिक वाहनों की दुनिया में मांग रिकॉर्ड स्तर पर है। हर देश EV क्रांति का झंडा उठा रहा है, लेकिन असली खेल में बाज़ी किसी और ने मारी है—चीन ने।

ग्लोबल टॉप 10 EV कंपनियों में 5 चीनी1 अमेरिकी, और बाकी यूरोपीय–कोरियाई कंपनियां शामिल हैं।
भारत का नाम? कहीं भी नहीं।

 कौन है EV की दुनिया का बादशाह?

एसएनई रिसर्च की ताज़ा रिपोर्ट बताती है—

  • 1st – BYD (चीन) : 19.9% मार्केट शेयर

  • 2nd – Geely (चीन) : 10.2%

  • 3rd – Tesla (अमेरिका) : 7.7%

  • 4th – Volkswagen (जर्मनी) : 6.7%

  • 5th – SAIC (चीन) : 5.6%

टॉप 10 में चीन की—
Changan (6), Chery (8)
इसके अलावा—Hyundai-Kia, BMW, Stellantis भी शामिल हैं।

यानी टॉप 10 में चीन 5, अमेरिका 1… भारत 0।

भारत कहां पीछे रह गया?

भारत में EV सेगमेंट में —

  • टाटा मोटर्स – घरेलू लीडर (62% मार्केट शेयर)

  • महिंद्रा – नई EV लाइनअप के साथ तेजी से बढ़ रही

लेकिन समस्या यह है कि—

 टाटा की एक साल की बिक्री = 68,980 EVs
 BYD की एक साल की बिक्री = 17.6 लाख EVs

यानी चीन जितना बेचता है, भारत उतना बनाता भी नहीं!

भारत की EV इंडस्ट्री अभी पूरी तरह घरेलू है,
जबकि चीन ग्लोबल सप्लाई चेन + सस्ते प्रोडक्शन + बैटरी मैन्युफैक्चरिंग में पहले से बहुत आगे है।

 भारत को रोक रही असली चुनौतियाँ

  1. लिथियम-आयन बैटरी पर विदेशी निर्भरता

  2. कमज़ोर ग्लोबल सप्लाई चेन

  3. महंगे EV कंपोनेंट

  4. अंतरराष्ट्रीय स्तर की टेक्नोलॉजी की कमी

  5. सीमित प्रोडक्शन क्षमता

अगर भारत ग्लोबल टॉप-10 में आना चाहता है, तो बैटरी उत्पादन, R&D, लागत नियंत्रण और रणनीतिक विदेश साझेदारियों पर तुरंत फोकस करना होगा।

 क्या भारत के पास मौका है? बिल्कुल है!

भारत दुनिया के सबसे बड़े ऑटो मार्केट्स में से एक है।
अगर—

  • बैटरी की लोकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़े

  • EV टेक्नोलॉजी को ग्लोबल स्टैंडर्ड मिले

  • एक्सपोर्ट रणनीति मजबूत हो

तो आने वाले वर्षों में भारतीय कंपनियां भी टॉप-10 में जगह बना सकती हैं।

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