लोकसभा में गूंजा वंदे मातरम्… पर पीएम मोदी के बयान में छिपे उस ‘काले सच’ ने सबको चौंका दिया — आखिर 100 साल पर क्या हुआ था?

संसद के शीतकालीन सत्र के सातवें दिन लोकसभा का माहौल उस समय और ऐतिहासिक हो गया, जब ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष चर्चा शुरू हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि वंदे मातरम् पर चर्चा करना हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है।
उन्होंने कहा कि जिस मंत्र ने आजादी की लड़ाई को ऊर्जा दी, त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया, उस वंदे मातरम् का पुण्य स्मरण करना भारत के लिए सौभाग्य है।
बंकिम चंद्र चटर्जी को याद करते हुए पीएम मोदी ने कही बड़ी बात
पीएम मोदी ने बताया कि वंदे मातरम् की यात्रा 1875 में बंकिम चंद्र चटर्जी ने शुरू की थी। यह गीत ऐसे समय लिखा गया जब अंग्रेजी शासन अपने अत्याचारों के चरम पर था और ‘गॉड सेव द क्वीन’ को घर-घर पहुंचाने का षड्यंत्र चल रहा था।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् की हर पंक्ति उस दौर की दमनकारी नीतियों के खिलाफ भारतीयों की भावनाओं का स्वर थी।
“50, 100 और 150 साल… हर पड़ाव पर छुपी एक कहानी” — पीएम मोदी
पीएम मोदी ने वंदे मातरम् के 150 साल की यात्रा को याद करते हुए कुछ बेहद महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संदर्भ भी रखे।
-
जब वंदे मातरम् के 50 वर्ष पूरे हुए, तब देश गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था।
-
जब 100 वर्ष हुए, तब भारत आपातकाल की जंजीरों में कैद था और संविधान का “घोंट दिया गया था गला”, देशभक्ति की आवाज़ उठाने वालों को जेलों में ठूंसा जा रहा था।
-
अब 150 वर्ष, ऐसे समय में हैं जब भारत आत्मनिर्भर बनने और 2047 तक विकसित देश बनने का संकल्प ले चुका है।
पीएम ने कहा, “जिस गीत ने आजादी की ऊर्जा दी, उसके 100 साल पूरे होने पर भारत ने अपने इतिहास का एक काला कालखंड झेला।”
“वंदे मातरम् हमारी सांस्कृतिक परंपरा का आधुनिक अवतार”
मोदी ने कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारत की महान सांस्कृतिक परंपरा का आधुनिक रूप है।
उन्होंने संस्कृत की पंक्तियों —
“त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी…”
का उल्लेख करते हुए कहा कि वंदे मातरम् हर भारतीय का संकल्प है, जो पीढ़ियों से देश की आत्मा को प्रेरित करता आया है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अंग्रेजों के दौर में भारत को कमजोर और आलसी साबित करने की कोशिशों के बीच बंकिम दा ने वंदे मातरम् लिखकर पूरे देश की चेतना को जगाया था।
“अंग्रेज समझ चुके थे कि भारत में टिकना मुश्किल है”
पीएम मोदी ने आगे कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ गीत नहीं बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की संपूर्ण यात्रा का भाव है—
एक ऐसी धारा, जो हर भारतीय को एक सूत्र में बांधती है।
उन्होंने कहा, “अंग्रेज जानते थे कि भारत में लम्बे समय तक टिकना मुश्किल होगा, इसलिए उन्होंने ‘बाँटो और राज करो’ का रास्ता चुना। लेकिन वंदे मातरम् की भावना इतनी प्रबल थी कि वह हर कोशिश पर भारी पड़ी।”









