क्या सब्जियों में भी होता है मेल-फीमेल? बैंगन, शिमला मिर्च, खीरा और तरबूज को लोग नर-मादा क्यों कहते हैं? विज्ञान क्या कहता है, आइए समझते हैं।
"मादा बैंगन" और "नर तरबूज" जैसी बातें सुनने में भले ही दिलचस्प लगें, लेकिन इन्हें वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जा सकता। यह बाजार में प्रचलित लोक मान्यता और अनुभव की भाषा है। इसलिए अगली बार सब्जी खरीदते समय इन बातों को एक दिलचस्प जानकारी की तरह जरूर लें, लेकिन अंतिम फैसला उसकी ताजगी, गुणवत्ता और पकाव देखकर ही करें।

Male Female Vegetables : सब्जी खरीदते समय कई बार दुकानदार ऐसी बातें कह देते हैं जो सुनकर हैरानी होती है। कोई “मादा बैंगन” लेने की सलाह देता है तो कोई “मेल शिमला मिर्च” को पकाने के लिए बेहतर बताता है। पहली बार सुनने वाले के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सचमुच सब्जियों का भी जेंडर होता है?
असल में यह धारणा वर्षों से चली आ रही बाजार की परंपरा का हिस्सा है। कई सब्जी विक्रेता और किसान अपने अनुभव के आधार पर कुछ खास आकार और बनावट वाली सब्जियों को “नर” या “मादा” कहकर पहचानते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार में बिकने वाली हर सब्जी वास्तव में मेल या फीमेल होती है।
आखिर यह धारणा बनी कैसे?
समय के साथ लोगों ने देखा कि कुछ बैंगन में बीज कम निकलते हैं, कुछ शिमला मिर्च अपेक्षाकृत मीठी होती हैं और कुछ खीरे ज्यादा कुरकुरे लगते हैं। इन अंतर को याद रखने के लिए स्थानीय स्तर पर उन्हें “नर” और “मादा” जैसे नाम दिए जाने लगे। धीरे-धीरे यह बोलचाल का हिस्सा बन गया और आज भी कई मंडियों में यही भाषा सुनने को मिलती है।
किन सब्जियों को सबसे ज्यादा कहा जाता है नर और मादा?
बैंगन में नीचे बने निशान को देखकर कई लोग उसकी पहचान करते हैं। वहीं शिमला मिर्च में नीचे बने उभारों की संख्या को आधार बनाया जाता है। खीरे और तरबूज में आकार तथा बीजों की मात्रा देखकर लोग अपनी राय बना लेते हैं। भिंडी में मोटाई और कोमलता को आधार माना जाता है।ध्यान देने वाली बात यह है कि ये सभी पहचान अनुभव पर आधारित हैं, किसी वैज्ञानिक वर्गीकरण पर नहीं।
विज्ञान क्या कहता है?
वनस्पति विज्ञान के अनुसार पौधों में नर और मादा फूल हो सकते हैं। कुछ फसलों में दोनों प्रकार के फूल अलग-अलग होते हैं, जबकि कई पौधों में एक ही फूल में दोनों प्रजनन अंग मौजूद रहते हैं। लेकिन जब फूल फल या सब्जी में बदल जाता है, तब उसे “मेल” या “फीमेल” कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं माना जाता।यानी बाजार में रखा बैंगन, शिमला मिर्च, खीरा, भिंडी या तरबूज किसी इंसान या जानवर की तरह नर या मादा नहीं होता।
फिर अच्छी सब्जी कैसे चुनें?
यदि स्वाद और गुणवत्ता चाहिए तो जेंडर के बजाय कुछ आसान बातों पर ध्यान दें। ताजी और चमकदार सब्जियां लें, जिन पर दाग या सड़न न हो। वजन के हिसाब से भारी फल या सब्जी अक्सर अधिक रसदार होती है। मौसम के अनुसार मिलने वाली ताजा उपज का स्वाद भी बेहतर होता है।\
बैंगन में कैसे होती है पहचान?
बैंगन के निचले हिस्से पर बने निशान को देखकर कई लोग उसकी पहचान करते हैं। माना जाता है कि यदि निशान गोल और चौड़ा हो तो उसे “मादा बैंगन” कहा जाता है। ऐसे बैंगन में बीज अपेक्षाकृत कम और गूदा ज्यादा होने की बात कही जाती है, इसलिए भरता या ग्रिल करने के लिए इसे बेहतर माना जाता है।वहीं, लंबा और संकरा निशान वाले बैंगन को “नर बैंगन” कहा जाता है। लोक मान्यता के अनुसार इनमें बीज ज्यादा होते हैं और इन्हें सामान्य सब्जी या अचार के लिए उपयुक्त माना जाता है।
भिंडी में भी होती है ऐसी मान्यता
मंडी में मोटी, मुलायम और चमकदार भिंडी को कई लोग “मादा” बताते हैं। माना जाता है कि यह जल्दी पकती है और स्वाद में बेहतर होती है। जबकि पतली और अपेक्षाकृत सख्त भिंडी को “नर” कहा जाता है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
शिमला मिर्च के चार उभार वाली कहानी
शिमला मिर्च को लेकर भी एक लोकप्रिय धारणा है। जिन शिमला मिर्च के नीचे चार उभार (Lobes) होते हैं, उन्हें “मादा” कहा जाता है और माना जाता है कि वे ज्यादा मीठी व रसदार होती हैं। वहीं तीन उभार वाली शिमला मिर्च को “नर” कहकर पकाने के लिए बेहतर माना जाता है।लेकिन कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार शिमला मिर्च के नीचे बने उभारों का उसके स्वाद या किसी “जेंडर” से सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है।
खीरा और तरबूज के बारे में क्या कहते हैं लोग?
छोटे, मोटे और कम बीज वाले खीरे को कई लोग “मादा खीरा” कहते हैं, जबकि लंबे और ज्यादा बीज वाले खीरे को “नर” मानते हैं।इसी तरह गोल तरबूज को अधिक मीठा बताकर “मादा” और लंबे या अंडाकार तरबूज को “नर” कहा जाता है। हालांकि तरबूज की मिठास उसके पकने, किस्म, खेती की तकनीक और मौसम पर ज्यादा निर्भर करती है, न कि किसी कथित जेंडर पर।
निष्कर्ष
“मादा बैंगन” और “नर तरबूज” जैसी बातें सुनने में भले ही दिलचस्प लगें, लेकिन इन्हें वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जा सकता। यह बाजार में प्रचलित लोक मान्यता और अनुभव की भाषा है। इसलिए अगली बार सब्जी खरीदते समय इन बातों को एक दिलचस्प जानकारी की तरह जरूर लें, लेकिन अंतिम फैसला उसकी ताजगी, गुणवत्ता और पकाव देखकर ही करें।









