Jharkhand High Court: बर्खास्त शिक्षक को मिलेगा बकाया वेतन, वरीयता और सभी सेवा लाभ, जानिये हाईकोर्ट ने क्यों कहा, बहाली का मतलब सिर्फ नौकरी लौटाना नहीं, बल्कि….

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि अवैध रूप से बर्खास्त शिक्षक को बहाली के साथ बकाया वेतन, वरिष्ठता और सभी सेवा लाभ मिलेंगे। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत का महत्वपूर्ण फैसला।

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने शिक्षकों को लेकर बड़ा ही अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने बर्खासत हुए शिक्षक के सेवा अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी शिक्षक की बर्खास्तगी अवैध पाई जाती है, तो उसे केवल नौकरी पर वापस लेना ही पर्याप्त नहीं है। ऐसे कर्मचारी को बकाया वेतन, वरिष्ठता (वरियता) और सेवा से जुड़े अन्य सभी वैधानिक लाभ भी दिए जाने चाहिए।

जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने कहा कि “बहाली” (Reinstatement) का वास्तविक अर्थ कर्मचारी को उसी स्थिति में वापस लाना है, जिसमें वह सेवा समाप्त किए जाने से पहले था। इसलिए अवैध रूप से सेवा से हटाए गए कर्मचारी को उसके सभी सेवा अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।

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क्या है मामला?

मामला गिरिडीह जिले के लंगटा बाबा कॉलेज में राजनीति विज्ञान के व्याख्याता रहे बिनोद कुमार राय से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का कहना था कि कॉलेज प्रबंधन ने वर्ष 2008 में बिना विभागीय जांच पूरी किए उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। इसके बाद उन्होंने इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी।सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति याचिकाकर्ता के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं कर सकी थी। इसके बावजूद उनकी सेवा समाप्त कर दी गई थी।

कुलपति ने बर्खास्तगी को बताया था अवैध

बाद में दायर एक अन्य याचिका पर विश्वविद्यालय के कुलपति ने 5 अप्रैल 2019 को आदेश जारी करते हुए बर्खास्तगी को अवैध माना और याचिकाकर्ता को व्याख्याता के पद पर बहाल करने का निर्देश दिया। हालांकि उस आदेश में बकाया वेतन, वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया था। साथ ही आदेश में कुछ प्रतिकूल टिप्पणियां भी दर्ज थीं, जिन्हें याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

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हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब स्वयं सक्षम प्राधिकारी बर्खास्तगी को अवैध घोषित कर चुका है, तब कर्मचारी को बकाया वेतन और अन्य सेवा लाभों से वंचित रखना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता को लंबे समय तक न्याय के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ा, जिससे उसे अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि अवैध बर्खास्तगी की स्थिति में कर्मचारी को केवल पद पर बहाल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी सेवा निरंतर मानते हुए उसे वरिष्ठता, वेतन और अन्य सभी वैधानिक लाभ भी उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

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