BSF Inspector Mahendra Tiria Death: बीएसएफ इंस्पेक्टर महेंद्र तिरिया का निधन, ड्यूटी के दौरान बिगड़ी थी तबीयत, इलाज के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति, सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई
Death of BSF Inspector Mahendra Tiria: BSF Inspector Mahendra Tiria has passed away; he had fallen ill while on duty, and his condition did not improve despite medical treatment. He was accorded a final farewell with military honors.

चाईबासा। इंस्पेक्टर महेंद्र तिरिया की मौत हो गयी। वो पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव प्रखंड स्थित धोबाधोबी गांव के रहने वाले थे। सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम सस्कार हुआ। दरअसल सीमा सुरक्षा बल (BSF) के इंस्पेक्टर महेंद्र तिरिया कुछ वक्त से बीमार चल रहे थे। वे राजस्थान के जैसलमेर स्थित रामगढ़ सेक्टर में बीएसएफ की 26वीं बटालियन में तैनात थे। शनिवार को चाईबासा सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद बीएसएफ के अधिकारियों और जवानों ने उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी।
ड्यूटी के दौरान बिगड़ी थी तबीयत
परिजनों के अनुसार महेंद्र तिरिया लंबे समय से मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित थे। कुछ दिन पहले ड्यूटी के दौरान उनकी अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। चिकित्सकीय जांच के बाद उन्हें उपचार के लिए अवकाश दिया गया और 6 जुलाई को वे अपने घर चाईबासा लौटे थे। हालांकि घर आने के बाद भी उनकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ। हालत गंभीर होने पर उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शुक्रवार को उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।
तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को दी गई अंतिम सलामी
निधन की सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। शनिवार को सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया। इस दौरान बीएसएफ के अधिकारी और जवान भी चाईबासा पहुंचे। तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी अर्पित की गई। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव धोबाधोबी ले जाया गया।
करीब चार दशक तक की देश सेवा
महेंद्र तिरिया वर्ष 1988 बैच के बीएसएफ अधिकारी थे। उन्होंने करीब चार दशक तक सीमा सुरक्षा बल में सेवाएं दीं। ग्रामीणों के अनुसार वे अनुशासित, कर्तव्यनिष्ठ और मिलनसार अधिकारी थे। जब भी अवकाश पर गांव आते थे, युवाओं को सेना और अर्धसैनिक बलों में भर्ती होकर देश सेवा करने के लिए प्रेरित करते थे।महेंद्र तिरिया अपने पीछे पत्नी, दो बेटियों और एक बेटे का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन से पूरे गांव और क्षेत्र में शोक की लहर है।









