रायपुर में हुई बंद कमरे की अहम बैठक! भारत-अमेरिका व्यापार को लेकर बनेगी बड़ी रिपोर्ट, कई अहम सुझावों पर मंथन
कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में नए अवसरों की तलाश, सांसदों और उद्योग प्रतिनिधियों ने रखे महत्वपूर्ण सुझाव

रायपुर। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने की कवायद के तहत रायपुर में गुरुवार को संसदीय स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। राजधानी के एक निजी होटल में हुई इस बैठक में व्यापार, निवेश, निर्यात-आयात और आर्थिक सहयोग से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक को लेकर प्रशासनिक और व्यापारिक हलकों में दिनभर चर्चा का माहौल बना रहा।
राज्यसभा सांसद एवं वाणिज्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति की अध्यक्ष डोला सेन की अध्यक्षता में आयोजित यह बैठक समिति के 10 से 12 जून 2026 तक चल रहे अहमदाबाद, रायपुर और भुवनेश्वर अध्ययन दौरे का हिस्सा थी। समिति भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के मूल्यांकन विषय पर विभिन्न पक्षों से सुझाव जुटाकर एक व्यापक रिपोर्ट तैयार कर रही है।
बैठक में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े उत्पादकों, प्रसंस्करणकर्ताओं, निर्यातकों, उद्योग संगठनों और वाणिज्य मंडलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने, वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच मजबूत करने तथा अमेरिका के साथ व्यापारिक अवसरों के विस्तार पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), अखिल भारतीय खाद्य प्रसंस्करण संघ, अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ, भारतीय खाद्य एवं पेय संघ, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा वाणिज्य विभाग के अधिकारियों ने भी भाग लिया और अपने अनुभव एवं सुझाव साझा किए।
समिति ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने, निवेश आकर्षित करने, निर्यात संवर्धन तथा कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए नए वैश्विक बाजार विकसित करने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। अध्ययन दौरे के दौरान प्राप्त सुझावों और जानकारियों के आधार पर समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसे भविष्य की व्यापारिक नीतियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस अवसर पर संसदीय स्थायी समिति के कई सदस्य सांसद भी मौजूद रहे। बैठक में व्यापारिक चुनौतियों, अवसरों और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति देने के लिए विभिन्न सुझावों पर विचार किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विमर्श भविष्य में भारतीय कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए नए निर्यात द्वार खोल सकते हैं।












