झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला…डेपुटेशन पर काम कर रहे प्रोफेसरों को मिलेगा अकादमिक भत्ता…वर्षों पुराना विवाद खत्म

Jharkhand High Court's Major Verdict: Professors Serving on Deputation to Receive Academic Allowance—Years-Old Dispute Resolved.

झारखंड  : रांची से जुड़ा यह फैसला राज्य के सरकारी शिक्षण संस्थानों में कार्यरत डेपुटेशन कर्मचारियों और प्रोफेसरों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे सभी कर्मियों को अब अकादमिक भत्ता मिलेगा, जिससे लंबे समय से चल रहा विवाद समाप्त हो गया है।

क्या था मामला: रिम्स से जुड़ा विवाद बना केंद्र

यह पूरा मामला RIMS रांची में डेपुटेशन पर कार्यरत डॉक्टरों और प्रोफेसरों से जुड़ा था। ये कर्मचारी राज्य सरकार की सेवा में रहते हुए मेडिकल कॉलेज और संस्थानों में शिक्षण कार्य कर रहे थे।

साल 2019 में राज्य सरकार ने इन्हें अकादमिक भत्ता देने से इनकार कर दिया था, जिसके खिलाफ करीब 70 प्रोफेसरों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

कोर्ट का फैसला: समान काम के लिए समान लाभ का सिद्धांत लागू

हाईकोर्ट ने सरकार के 2019 के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि जो प्रोफेसर और शिक्षक शैक्षणिक कार्य कर रहे हैं, उन्हें समान काम के लिए समान लाभ मिलना चाहिए। इसलिए अकादमिक भत्ता न देना अनुचित है।

याचिकाकर्ताओं की दलील: देशभर में मिल रहा लाभ

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि वे पूरी तरह से शिक्षण कार्य कर रहे हैं और देश के अन्य संस्थानों जैसे एम्स में भी अकादमिक भत्ता दिया जाता है। ऐसे में झारखंड में भेदभाव नहीं किया जा सकता।

2018 से 2019 तक चला विवाद: आदेश बदले और रद्द हुए

रिम्स की गवर्निंग बॉडी ने 2018 में अकादमिक भत्ता देने का फैसला लिया था, लेकिन 2019 में राज्य सरकार ने इसे खारिज कर दिया था। अब कोर्ट के फैसले के बाद वह आदेश अमान्य हो गया है।

फैसले का असर: कर्मचारियों को आर्थिक लाभ और नई मिसाल

इस निर्णय से राज्य में डेपुटेशन पर कार्यरत डॉक्टरों और प्रोफेसरों को आर्थिक लाभ मिलेगा। साथ ही यह फैसला भविष्य में अन्य संस्थानों के लिए भी एक महत्वपूर्ण नजीर बन सकता है।

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