देर रात पुरुष से फोन पर बात करना चरित्रहीनता नहीं, महिला की निजता का सम्मान जरूरी: दिल्ली कोर्ट

दिल्ली कोर्ट ने कहा कि किसी महिला का देर रात पुरुष से फोन पर बात करना उसके चरित्र पर सवाल उठाने का आधार नहीं है। अदालत ने पत्नी के कॉल डिटेल रिकॉर्ड मांगने वाले पति की अपील खारिज कर निजता के अधिकार को बरकरार रखा।

नई दिल्ली। अदालत ने महिलाओं की निजता और सम्मान को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी महिला का देर रात किसी पुरुष से फोन पर बात करना उसके चरित्र पर सवाल उठाने का आधार नहीं हो सकता। दिल्ली की एक अदालत ने स्पष्ट किया कि आधुनिक भारतीय समाज में महिलाओं और पुरुषों के बीच बातचीत को संदेह की नजर से देखना उचित नहीं है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शुनाली गुप्ता ने यह टिप्पणी एक घरेलू हिंसा मामले की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने एक व्यक्ति की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपनी पत्नी और एक अन्य व्यक्ति के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) सुरक्षित रखने की मांग की थी।

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पत्नी के कॉल रिकॉर्ड मांगने पहुंचा था पति

मामला एक घरेलू हिंसा विवाद से जुड़ा था। पति का दावा था कि उसकी पत्नी देर रात एक अन्य पुरुष से बातचीत करती थी और यही उनके वैवाहिक विवाद का प्रमुख कारण था। उसने अदालत से पत्नी और संबंधित व्यक्ति के कॉल डिटेल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की थी ताकि वह अपने पक्ष को मजबूत कर सके।हालांकि निचली अदालत ने इस मांग को पहले ही खारिज कर दिया था। इसके बाद पति ने उस आदेश को चुनौती देते हुए सत्र अदालत में अपील दायर की थी।

अदालत बोली- भारतीय समाज बदल चुका है

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि भारतीय समाज अब इतना पिछड़ा नहीं रहा कि किसी महिला की पुरुष से बातचीत को गलत या संदिग्ध माना जाए। आज महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों, निजी कंपनियों, सरकारी संस्थानों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में काम कर रही हैं, जहां उनके पुरुष सहकर्मियों से बातचीत स्वाभाविक और आवश्यक है।कोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर कि कोई महिला रात के समय किसी पुरुष से फोन पर बात कर रही है, उसके चरित्र पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।

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निजता के अधिकार में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं

अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति की निजता का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित है। हालांकि कुछ मामलों में निष्पक्ष सुनवाई के लिए निजता के अधिकार पर सीमित हस्तक्षेप किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए ठोस और विश्वसनीय आधार होना जरूरी है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल संदेह या अनुमान के आधार पर किसी महिला के निजी कॉल रिकॉर्ड की मांग करना उसकी निजता में अनुचित हस्तक्षेप होगा।

ठोस सबूत के बिना आरोप स्वीकार नहीं

फैसले में अदालत ने कहा कि पति अपनी आशंकाओं के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका। ऐसे में केवल देर रात फोन कॉल को आधार बनाकर विवाहेत्तर संबंध या किसी प्रकार के अनुचित आचरण का आरोप नहीं लगाया जा सकता।अदालत ने कहा कि जब तक किसी महिला के खिलाफ अवैध या गैरकानूनी संबंधों के स्पष्ट और प्रमाणित आरोप न हों, तब तक उसके निजी जीवन में इस तरह की दखलंदाजी उचित नहीं मानी जा सकती।

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महिलाओं की गरिमा और अधिकारों पर अहम टिप्पणी

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला महिलाओं की निजता, स्वतंत्रता और गरिमा के अधिकार को मजबूत करने वाला है। अदालत ने यह संदेश दिया है कि आधुनिक समाज में महिलाओं की सामान्य सामाजिक या पेशेवर बातचीत को उनके चरित्र से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

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