खर्राटे से हो सकती है मौत! नई स्टडी में बड़ा खुलासा, हार्ट अटैक से लेकर स्ट्रोक तक का बढ़ता है खतरा
हर चौथा खर्राटे लेने वाला व्यक्ति स्लीप एपनिया का हो सकता है शिकार, समय रहते इलाज और योग अपनाना जरूरी

Sleep Disorder। आपके परिवार में कोई व्यक्ति रोजाना तेज खर्राटे लेता है, तो इसे सामान्य आदत समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। हाल ही में सामने आई एक स्टडी ने चेतावनी दी है कि लगातार खर्राटे लेना केवल नींद की समस्या नहीं, बल्कि कई गंभीर बीमारियों और यहां तक कि मौत का कारण भी बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार खर्राटे लेने वाले लोगों में स्लीप एपनिया (Sleep Apnea) का खतरा काफी अधिक होता है, जो हृदय, मस्तिष्क और पूरे शरीर पर गंभीर असर डाल सकता है।
बढ़ रहे हैं “स्लीप डिवोर्स” के मामले
खर्राटों का असर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैवाहिक जीवन पर भी प्रभाव डाल रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि दुनिया भर में “स्लीप डिवोर्स” के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है।सिर्फ अमेरिका में ही ऐसे मामलों में करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
क्या होता है स्लीप डिवोर्स?
स्लीप डिवोर्स का मतलब कानूनी तलाक नहीं, बल्कि पति-पत्नी का अलग-अलग कमरों में सोना है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एक साथी के तेज खर्राटों की वजह से दूसरे की नींद बार-बार टूटती है, जिससे तनाव और रिश्तों में दूरी बढ़ने लगती है।
हर चौथा खर्राटे लेने वाला हो सकता है स्लीप एपनिया का मरीज
अध्ययन के अनुसार, लगातार खर्राटे लेने वाले हर चार में से एक व्यक्ति स्लीप एपनिया से पीड़ित हो सकता है।इस बीमारी में सोते समय व्यक्ति की सांस कुछ सेकंड के लिए बार-बार रुक जाती है। इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
खर्राटों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि स्लीप एपनिया का समय पर इलाज नहीं कराया जाए तो मरीज को कई गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।
इनमें शामिल हैं—
• हार्ट अटैक का खतरा
• ब्रेन स्ट्रोक
• हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन)
• डायबिटीज
• अत्यधिक थकान और मानसिक तनाव
• गंभीर मामलों में अचानक मृत्यु का खतरा
खर्राटों से छुटकारा पाने के उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खर्राटे नियमित रूप से आते हैं तो सबसे पहले डॉक्टर से जांच करानी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि कहीं यह स्लीप एपनिया का संकेत तो नहीं है।
इसके अलावा कुछ जीवनशैली में बदलाव भी राहत दे सकते हैं—
• रोजाना योग और प्राणायाम करें।
• वजन नियंत्रित रखें।
• धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं।
• पीठ के बजाय करवट लेकर सोने की आदत डालें।
• पर्याप्त और नियमित नींद लें।
• लगातार खर्राटे आने पर स्लीप स्टडी (Sleep Study) कराएं।
योग से मिल सकती है राहत
योग विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित योग और श्वास संबंधी अभ्यास (प्राणायाम) करने से गले की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जिससे खर्राटों की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और उज्जायी प्राणायाम जैसे अभ्यास लाभकारी माने जाते हैं।नोट: यदि खर्राटों के साथ रात में सांस रुकना, दिनभर नींद आना, तेज थकान या सुबह सिरदर्द जैसी समस्याएं भी हों तो इसे सामान्य न मानें और तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लें।








